नई दिल्ली/ गनपत चौहान/केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के तहत किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 5,547.99 करोड़ रुपये की दलहन और तिलहन फसलों की खरीद को मंजूरी प्रदान की।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और संभावित गिरावट से किसानों को सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि उत्पादकों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके। सरकार के इस कदम से विशेष रूप से दाल और तिलहन की खेती करने वाले लाखों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
राज्यवार खरीद का ब्योरा:
- उत्तर प्रदेश (3,992.57 करोड़ रुपये): मंजूर की गई कुल राशि में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है। राज्य में 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर (अरहर) की खरीद 3,937.70 करोड़ रुपये में की जाएगी। इसके अतिरिक्त 54.87 करोड़ रुपये की लागत से 6,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद एमएसपी पर होगी।
- कर्नाटक (1,107.00 करोड़ रुपये): कर्नाटक में दलहन और तिलहन उत्पादकों के लिए 1,107 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 659.27 करोड़ रुपये की लागत से 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन, 335.83 करोड़ रुपये में 38,250 मीट्रिक टन मूंग तथा 111.90 करोड़ रुपये में 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद को स्वीकृति दी गई है।
- तेलंगाना (448.42 करोड़ रुपये): तेलंगाना के लिए 448.42 करोड़ रुपये की खरीद योजना स्वीकृत हुई है। इसके अंतर्गत 353.90 करोड़ रुपये से 62,000 मीट्रिक टन सोयाबीन और 94.52 करोड़ रुपये से 10,766 मीट्रिक टन मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी।
दाल और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों का कल्याण, उनकी आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। समर्थन मूल्य पर व्यापक खरीद से न केवल किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि देश में दालों और तिलहनों के घरेलू उत्पादन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। इससे खाद्य तेलों और दलहन के क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम होगी और भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
सीधे बैंक खातों में पहुंचेगा भुगतान
केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि सभी निर्धारित खरीद केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सुगम और तकनीक आधारित रहेगी। किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। उपज की तौल और गुणवत्ता सत्यापन के बाद निर्धारित समर्थन मूल्य की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी। तीनों राज्यों में संबंधित एजेंसियों को खरीद के सुचारू संचालन के आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।