नरेश गुनानी
किशनगढ़ बास (खैरथल-तिजारा)। सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों को झांसे में लेकर मोटी ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। खैरथल-तिजारा जिला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन म्यूल हंटर” (Operation Mule Hunter) के तहत कार्रवाई करते हुए किशनगढ़ बास थाना पुलिस ने तीन शातिर साइबर ठगों को दबोचा है। पुलिस ने इनके पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले 08 संदिग्ध मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
एसपी के निर्देशन में पुलिस की स्पेशल स्ट्राइक
यह पूरी कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक (SP) बृजेश ज्योति उपाध्याय के सख्त निर्देशों पर अमल में लाई गई। इस विशेष अभियान की जमीनी निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) जया सिंह और वृत्ताधिकारी (CO) लालसिंह यादव के सुपरविजन में की जा रही थी। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना और तकनीकी विश्लेषण (Technical Surveillance) के बाद किशनगढ़ बास थानाधिकारी बनवारी लाल मीणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने जाल बिछाकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी:
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी मेवात और आसपास के इलाकों से सक्रिय होकर देशव्यापी नेटवर्क चला रहे थे:
- जकरिया उर्फ जीकू – निवासी: बेवड़ी का बास, बाघोड़ा
- अब्बास – निवासी: ताजूबास, मिर्जापुर
- सारुक खान – निवासी: थानाघोड़ा
सोशल मीडिया को बनाया हथियार: जानिए कैसे करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ और शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन ठगों का तरीका बेहद शातिराना था।
- दुर्लभ नोटों का लालच: ये अपराधी फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक विज्ञापन और पोस्ट डालते थे। इसमें दावा किया जाता था कि वे पुराने और दुर्लभ करेंसी नोट व सिक्के (जैसे 786 नंबर वाले नोट या माता वैष्णो देवी वाले सिक्के) लाखों-करोड़ों रुपये में खरीदते हैं।
- प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूली: जैसे ही कोई मासूम नागरिक इनके झांसे में आकर संपर्क करता, ये लोग उसे झांसा देकर विश्वास में ले लेते। इसके बाद, नोट पास होने की बात कहकर ‘रजिस्ट्रेशन फीस’, ‘फाइल चार्ज’, ‘आरबीआई टैक्स’ और ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई आईडी में हजारों-लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लेते थे।
- पैसे मिलते ही गायब: रकम ट्रांसफर होने के बाद ये आरोपी अपने मोबाइल नंबर बंद कर देते थे और पीड़ित से संपर्क तोड़ लेते थे।
बड़े अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हो सकते हैं तार
थाना पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जो 08 संदिग्ध मोबाइल फोन बरामद किए हैं, उनमें कई फर्जी सिम कार्ड और बैंकिंग ऐप्स होने की आशंका है। पुलिस अब इन मोबाइलों के डेटा, कॉल कट्स और बैंक ट्रांजेक्शन (Call Details and Bank Transactions) की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों में सक्रिय बड़े साइबर सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
टीम की विशेष भूमिका: इस पूरी रेड और धरपकड़ की कार्रवाई में किशनगढ़ बास थाने के उपनिरीक्षक विजय कुमार, कांस्टेबल धनसिंह, अकबर खान और जैकम खान ने अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई।
पुलिस की आमजन से अपील: लालच में न आएं
इस बड़ी सफलता के बाद खैरथल-तिजारा जिला पुलिस ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधिकारियों ने कहा:
”सोशल मीडिया पर पुराने नोट या सिक्के खरीदने-बेचने के नाम पर करोड़ों रुपये देने का दावा करने वाले सभी विज्ञापन पूरी तरह फर्जी हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ऐसी किसी भी गतिविधि को मान्यता नहीं देता। नागरिक किसी भी अज्ञात व्यक्ति को प्रोसेसिंग फीस या टैक्स के नाम पर पैसा ट्रांसफर न करें। यदि ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो तुरंत नजदीकी थाने में या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।”