कार्तिक शुक्ल पक्ष में ज्योतिष का अद्भुत संयोग — छह सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे, जनमानस के लिए रहेगा शुभ
— पुष्कर तीर्थ में स्नान, दान, हवन और परिक्रमा से मिलेगा अक्षय पुण्य फल
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर।
कार्तिक शुक्ल पक्ष इस वर्ष ज्योतिष के दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस अवधि में छह सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं, जो जनमानस के लिए शुभ परिणाम देने वाले बताए गए हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन योगों में स्नान, दान, हवन, पूजन और परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
इन तिथियों पर रहेंगे सर्वार्थ सिद्धि योग
पंडित कैलाश नाथ गोपीनाथ दाधीच के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष में निम्न तिथियों पर सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा —
- 23 अक्टूबर (गुरुवार) — द्वितीया
- 24 अक्टूबर (शुक्रवार) — तृतीया
- 26 अक्टूबर (रविवार) — पंचमी
- 2 नवंबर (रविवार) — एकादशी
- 4 नवंबर (सोमवार) — त्रयोदशी
- 5 नवंबर (बुधवार) — पूर्णिमा
इन छह दिनों में किए गए धार्मिक कर्म — जैसे स्नान, दान, हवन, ब्रह्म परिक्रमा, और देव दर्शन — से व्यक्ति को सामान्य समय की तुलना में कई गुना फल प्राप्त होता है।
पंचतीर्थ स्नान और भीष्म पंचक की महिमा
1 नवंबर (शनिवार) से भीष्म पंचक स्नान प्रारंभ होगा, जो 5 नवंबर पूर्णिमा तक चलेगा।
कार्तिक शुक्ल दशमी (1 नवंबर) को प्रातः 9:12 बजे एकादशी का आगमन होगा। इस दिन से स्नान प्रारंभ करने पर पंचतीर्थ स्नान का फल मिलता है।
पंडित दाधीच ने बताया कि 2 नवंबर कार्तिक शुक्ल एकादशी रविवार को प्रातः 7:32 बजे द्वादशी प्रारंभ होगी। अतः इस दिन दो बार स्नान करने से एकादशी और द्वादशी दोनों का पुण्य फल प्राप्त होगा। यह तिथियों के घटने-बढ़ने से बना अद्भुत योग है।
विशेष पर्व और व्रत
कार्तिक शुक्ल पक्ष में इस बार धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व पड़ रहे हैं —
- 1 नवंबर (शनिवार) — देव प्रबोधिनी एकादशी, गृहस्थों के लिए स्मार्त व्रत।
- 2 नवंबर (रविवार) — तुलसी विवाह, वैष्णव एवं निंबार्क संप्रदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत।
- 4 नवंबर (मंगलवार) — ब्रह्म चतुर्दशी / वैकुंठ चतुर्दशी, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृत योग भी रहेगा। इस योग में ब्रह्म सरोवर और ब्रह्मा जी के दर्शन से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- 5 नवंबर (बुधवार) — पूर्णिमा तक सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 6:59 बजे तक रहेगा, इसके बाद प्रतिपदा प्रारंभ होगी।
पुष्कर में पद्म क योग का विशेष संयोग
6 नवंबर (गुरुवार) को पद्म क योग और मृगछला स्नान का अद्भुत संगम रहेगा। यह योग दोपहर 2:52 से रात 3:28 तक — लगभग 12 घंटे तक प्रभावी रहेगा।
पद्म, विष्णु, मत्स्य, अग्नि, ब्रह्म पुराणों और पुष्कर माहात्म्य में वर्णित है कि इस योग में भगवान ब्रह्मा जी सावित्री और गायत्री के साथ हंस पर विराजमान होकर पृथ्वी पर विचरण करते हैं और तीर्थराज पुष्कर में निवास करते हुए समस्त भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य का वरदान देते हैं।
तीर्थराज पुष्कर में दर्शन और स्नान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थराज पुष्कर, मध्य पुष्कर और कनिष्ठ पुष्कर में स्नान, दान, पूजन और परिक्रमा करने से करोड़ों गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
इस दौरान पुष्कर में ब्रह्म सावित्री, ब्रह्म गायत्री और ब्रह्मा जी के दर्शन का विशेष महत्व है।