संशोधनों के मसौदे का मुख्य उद्देश्य लाइसेंसिंग की समय-सीमा को कम करना और नियामक दक्षता बढ़ाना
- उच्च जोखिम वाले उपकरणों (क्लास सी और डी) की लाइसेंसिंग समय-सीमा 105 दिन से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव
- हितधारकों और जनता से मांगे गए सुझाव; सीडीएससीओ की वेबसाइट पर अधिसूचना उपलब्ध
नई दिल्ली, 28 जून | नरेश गुनानी
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश में चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को अधिक सुगम, त्वरित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने ‘चिकित्सा उपकरण नियम, 2017’ में संशोधन के लिए एक राजपत्र (गैजेट) का मसौदा जारी किया है। इस प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के कड़े मानकों से समझौता किए बिना चिकित्सा उपकरणों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाना और इसमें लगने वाले समय को कम करना है। सरकार के इस कदम से देश में ‘कारोबार में सुगमता’ (Ease of Doing Business) को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जोखिम श्रेणियों के आधार पर समय-सीमा में कटौती का प्रस्ताव
वर्तमान व्यवस्था के तहत ‘चिकित्सा उपकरण नियम, 2017’ में उपकरणों को उनके जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों—क्लास ए, क्लास बी, क्लास सी और क्लास डी—में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास ए में सबसे कम और क्लास डी में सबसे अधिक जोखिम वाले उपकरण आते हैं।
संशोधन मसौदे के तहत विभिन्न श्रेणियों के लाइसेंस आवेदनों के निपटारे की वैधानिक समय-सीमा को युक्तिसंगत बनाते हुए इसमें बड़ी कटौती करने का प्रस्ताव है:
- क्लास बी (निम्न से मध्यम जोखिम): इसके अंतर्गत ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक सुइयां और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण आते हैं। इनके लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा को 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव है।
- क्लास सी और डी (उच्च से अधिकतम जोखिम): इसके अंतर्गत हृदय स्टेंट (Cardiac Stents), कूल्हे और घुटने के प्रत्यारोपण (Implants) तथा अन्य जटिल हड्डी रोग उपकरण आते हैं। इनके लिए समय-सीमा को 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है।
लाइसेंसिंग प्रक्रिया के हर चरण के लिए तय होगी समय-सीमा
प्रस्तावित संशोधनों में न केवल कुल समय-सीमा को कम किया गया है, बल्कि प्रक्रिया के प्रत्येक आंतरिक चरण के लिए भी स्पष्ट और कड़े नियम तय किए गए हैं। इसके तहत निम्नलिखित प्रक्रियाओं के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित होगी:
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- प्राप्त आवेदनों की प्राथमिक जांच (Scrutiny)
- अधिसूचित निकायों (Notified Bodies) द्वारा किए जाने वाले ऑडिट
- नियमों के अनुपालन का सत्यापन (Verification)
- अंतिम लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया
नियामक व्यवस्था में आएगी पारदर्शिता: इन बदलावों से पूरी नियामक व्यवस्था अधिक पारदर्शी, पूर्वानुमान योग्य और दक्ष बनेगी। इसका सीधा लाभ चिकित्सा उपकरण उद्योग के साथ-साथ आम मरीजों को भी मिलेगा, क्योंकि उन तक उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक चिकित्सा उपकरण और तकनीक बेहद कम समय में पहुंच सकेंगे।
हितधारकों से मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक कर दिया गया है ताकि इस क्षेत्र से जुड़े सभी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और आम जनता से विचार-विमर्श किया जा सके।
नोट: यह अधिसूचना भारत के राजपत्र के साथ-साथ केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। सभी संबंधित हितधारक निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव, टिप्पणियां और आपत्तियां सरकार को भेज सकते हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।