जयपुर /नरेश गुनानी/26 जुलाई 2026 — कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को राजस्थान विधानसभा परिसर में स्थित कारगिल शौर्य वाटिका में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शौर्य वाटिका में निर्मित स्मारक स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के अमर शहीदों को नमन किया।
इससे पूर्व, वासुदेव देवनानी ने प्रातः जयपुर स्थित ‘अमर जवान ज्योति’ पहुंचकर भी पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों ने दी श्रद्धांजलि
कारगिल विजय दिवस के इस गरिमामय अवसर पर कई प्रमुख राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तियों ने शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया:
- पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष: रथीन्द्र बोस
- नेता प्रतिपक्ष (राजस्थान विधानसभा): टीकाराम जूली
- विधायक: गोपाल शर्मा
- अध्यक्ष, राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड: प्रेम सिंह बाजोर
- प्रमुख सचिव (विधानसभा): भारत भूषण शर्मा
इस दौरान आरएसी (RAC) बटालियन के अधिकारियों एवं जवानों ने अमर शहीदों के सम्मान में सलामी दी। कार्यक्रम में विधानसभा के अनेक अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
”राजस्थान वीरों की भूमि, जवानों का बलिदान अतुलनीय”: वासुदेव देवनानी
श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कारगिल युद्ध (1999) के महत्व और राजस्थान की सैन्य परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा:
”कारगिल विजय दिवस हमारे वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने का पावन अवसर है। राजस्थान वीरों की वसुंधरा है, जहाँ के जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा में सदैव अग्रिम पंक्ति में रहकर अपना योगदान दिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा परिसर में कारगिल शौर्य वाटिका की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हमारे वीर जवानों की वीरता और बलिदान की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवंत बनाए रखना है।
शहीदों की स्मृति और पर्यावरण संरक्षण का संगम
विधानसभा परिसर में बनी यह शौर्य वाटिका केवल एक स्मारक स्थल ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और देशप्रेम का एक अनूठा संगम भी है:
- वीरांगनाओं के साथ पौधारोपण: गत वर्ष कारगिल शौर्य वाटिका में 21 वीरांगनाओं के साथ मिलकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे।
- प्रमुख पौधों की प्रजातियां: इनमें सिंदूर, एरिका पाम, सांग ऑफ इंडिया, किसना फाइकस और क्रोटोन जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
- पर्यावरणीय महत्व: ये पौधे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के प्रतीक होने के साथ-साथ वायु प्रदूषण को कम करने में भी सहायक हैं।