कानस के नौनिहाल पूछ रहे- हमें कब मिलेगी राहत? जयपुर में कलेक्टर ने बदला समय, अजमेर के बच्चों को तपती दोपहर का इंतज़ार

(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर। प्रदेश में सूरज के तीखे तेवर और भीषण लू (Heat Wave) ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। गर्मी के इसी प्रकोप को देखते हुए जयपुर जिला प्रशासन ने बच्चों को राहत दे दी है, लेकिन अजमेर जिले के पुष्कर क्षेत्र स्थित कानस गांव के स्कूली बच्चों के लिए अभी भी “आसमान से आग” बरस रही है। यहाँ के मासूम छात्र भीषण गर्मी के बीच दोपहर की शिफ्ट में स्कूल जाने को मजबूर हैं।

जयपुर कलेक्टर का सख्त आदेश: 12 बजे बाद स्कूल बंद

​जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक ने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए 27 अप्रैल से स्कूलों के समय में बदलाव के आदेश जारी किए हैं।

  • नया समय: प्री-प्राइमरी से कक्षा 8वीं तक की कक्षाएं अब सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक ही संचालित होंगी।
  • सख्ती: यह आदेश सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होगा। आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कानस की विडंबना: दोपहर की ‘भट्टी’ में झोंके जा रहे मासूम

​जयपुर में तो राहत मिल गई, लेकिन अजमेर जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानस में स्थिति इसके उलट है। यहाँ कक्षा 1 से 5वीं तक के छोटे बच्चे दोपहर की उस ‘भट्टी’ को झेल रहे हैं, जिससे बचने की सलाह खुद सरकार की एडवाइजरी दे रही है।

समस्या की मुख्य वजह:

  • कमरों का अभाव: विद्यालय में कमरों की कमी के कारण स्कूल को दो शिफ्ट में चलाया जा रहा है।
  • दोहरा मापदंड: कक्षा 6 से 12वीं तक के बड़े विद्यार्थियों को तो सुबह 7 से 12 बजे की ‘ठंडी’ शिफ्ट दी गई है, लेकिन पहली से पांचवीं के मासूमों को दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक स्कूल बुलाया जा रहा है।

सरकारी एडवाइजरी बनाम धरातल की हकीकत

​सरकार और स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी स्पष्ट कहती है कि दोपहर 12 से 4 बजे के बीच लू के प्रकोप के कारण घर से बाहर न निकलें। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी नियम केवल कागजों तक सीमित हैं? कानस के छोटे बच्चे जब दोपहर 12 बजे तपती धूप में स्कूल पहुंचते हैं, तो उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा होता है।

अभिभावकों का आक्रोश: अजमेर कलेक्टर से उम्मीद

​कानस के ग्रामीण और अभिभावक प्रशासन के इस दोहरे रवैये से खासे नाराज हैं। अभिभावकों का कहना है, “जब जयपुर कलेक्टर बच्चों के प्रति संवेदनशीलता दिखा सकते हैं, तो अजमेर कलेक्टर हमारे बच्चों को इस आग से राहत कब पहुंचाएंगे?”

​अभिभावकों ने मांग की है कि कमरों का अभाव एक प्रशासनिक समस्या है, जिसकी सजा छोटे बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि छोटे बच्चों के लिए भी समय बदला जाए या भीषण गर्मी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

बड़ा सवाल: क्या शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है, या कानस के नौनिहालों की पुकार अजमेर के प्रशासनिक गलियारों तक पहुँचेगी?

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