कागजों में बुझ रही प्यास, धरातल पर भ्रष्टाचार की लीकेज!

गनपत चौहान 

​जल जीवन मिशन: धरमजयगढ़ के पुसलदा में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, करोड़ों डकार कर ठेकेदार और अफसर मस्त

कुड़ेकेला / रायगढ़:

केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘जल जीवन मिशन’ का बुनियादी मकसद देश के हर ग्रामीण घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। इस सपने को सच करने के लिए सरकार ने पानी की तरह पैसा भी बहाया। लेकिन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पुसलदा में इस योजना को भ्रष्टाचार का ऐसा घुन लगा है कि करोड़ों के बजट के बाद भी ग्रामीणों के गले सूखे हैं।

​यहाँ कागजों पर तो योजना सरपट दौड़ रही है, लेकिन धरातल पर यह सिर्फ ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की जेब भरने का जरिया बनकर रह गई है। भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।

​₹1.10 करोड़ का बजट: फाइलों में ‘हर घर जल’, जमीन पर ‘हर घर छल’

​सरकारी दस्तावेजों और फाइलों के मुताबिक, ग्राम पंचायत पुसलदा में ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए 109.79 लाख रुपये (लगभग 1 करोड़ 10 लाख) की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इस बजट के तहत निम्नलिखित कार्य किए जाने थे:

    • पानी टंकी: 100 किलोलीटर क्षमता और 12 मीटर ऊंचाई की भव्य आरसीसी स्टील स्ट्रक्चर टंकी का निर्माण।
    • पाइपलाइन: गांव की गलियों में 2330 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाना।
    • घरेलू कनेक्शन: गांव के 409 घरों में सीधे नल कनेक्शन देकर पानी पहुंचाना।

खेल देखिए: इस पूरे कार्य का जिम्मा साल 2022-23 में सराफ कंस्ट्रक्शन खरसिया को सौंपा गया था। लेकिन धरातल पर जो हकीकत निकलकर सामने आई है, वह सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाने वाली है।

 

​बिना ‘बोर’ के खड़ी कर दी पानी टंकी, कहां से आएगा पानी?

​ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार ने सिर्फ अपनी जेबें गर्म करने के लिए आनन-फानन में आधा-अधूरा ढांचा खड़ा किया, तस्वीरें खिंचवाईं और पीएचई (PHE) विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर कार्य पूर्ण होने का ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (Completion Certificate) हासिल कर पूरी राशि डकार ली।

​सबसे बड़ी और हैरान करने वाली विडंबना यह है कि गांव में पानी टंकी तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन उसमें पानी भरने के लिए ‘बोर’ (Source) ही नहीं किया गया है! जब पानी का मुख्य स्रोत ही गायब है, तो टंकी में पानी कहाँ से आएगा और ग्रामीणों के घरों तक कैसे पहुँचेगा? यह सवाल आज पूरी व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है।

​विभागीय इंजीनियर्स की भूमिका संदिग्ध: जांच के घेरे में अफसर

​पुसलदा में हुए इस ‘महाघोटाले’ को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे हुआ है। इस मामले में सीधे तौर पर निम्नलिखित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं:

      1. परीक्षित चौधरी (कार्यपालन अभियंता)
      2. सी.एल. कोरी (सहायक अभियंता)
      3. जयचंद भगत (उप अभियंता)

बड़ा सवाल: बिना किसी जमीनी सत्यापन (Physical Verification) के, एक ऐसे काम को ‘पूर्ण’ कैसे घोषित कर दिया गया जिसमें पानी का स्रोत ही उपलब्ध नहीं है? बिना काम पूरा हुए ठेकेदार को अंतिम भुगतान कैसे कर दिया गया? यह एक उच्च स्तरीय जांच का विषय है।

​जनप्रतिनिधियों की जुबानी, पुसलदा की कहानी

रामजी लाल (तत्कालीन सरपंच, ग्राम पंचायत पुसलदा):

“टंकी तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन उसमें आज तक पानी नहीं भरा गया। गांव के किसी भी घर के नल में पानी की एक बूंद तक नहीं आई है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए लालायित हैं और परेशान हो रहे हैं।”

 

केशव राठिया (उपसरपंच, पुसलदा):

“हमारे गांव में गर्मी के दिनों में पीने के पानी की भयानक समस्या होती है। अगर यह नल जल योजना सुचारू रूप से चालू रहती, तो आज गांव को यह किल्लत नहीं झेलनी पड़ती। सरकारी पैसे का यहां सिर्फ दुरुपयोग हुआ है।”

 

​भीषण गर्मी में ‘दूरियां’ नापने को मजबूर महिलाएं

​मई की इस तपती धूप और चिलचिलाती गर्मी में, जहां पारा आसमान छू रहा है, पुसलदा के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव की महिलाएं इस भीषण तपन में मीलों दूर स्थित अन्य जल स्रोतों से सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोने को मजबूर हैं।

​प्रधानमंत्री का सपना था कि ग्रामीण महिलाओं को पानी के संघर्ष से मुक्ति मिले और ‘हर घर जल’ पहुंचे, लेकिन धरमजयगढ़ के पुसलदा गांव में अधिकारियों और ठेकेदार की जुगलबंदी ने इसे ‘हर घर छल’ में तब्दील कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन जागता है या फिर ग्रामीण इसी तरह प्यासे रहने को मजबूर रहेंगे।

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