नरेश गुनानी
बेंगलुरु, 27 अप्रैल 2026
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार रात को बेंगलुरु स्थित कर्नाटक लोकभवन में आयोजित ‘राजस्थान राज्य स्थापना दिवस’ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी कार्यक्रम में राजस्थान की जीवंत संस्कृति और प्रवासियों के अपनी मातृभूमि के प्रति लगाव का अनूठा संगम देखने को मिला।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्थान की गौरवशाली परंपराओं और प्रवासी राजस्थानियों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
सांस्कृतिक पहचान और नई पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का स्थापना दिवस मात्र एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति, लोक परंपरा और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण निर्णय को रेखांकित करते हुए बताया:
- तिथि परिवर्तन: राजस्थान सरकार ने स्थापना दिवस को अंग्रेजी तारीख के बजाय भारतीय पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाने की नई पहल शुरू की है।
- सांस्कृतिक राजदूत: मुख्यमंत्री ने प्रवासी राजस्थानियों को प्रदेश का ‘सांस्कृतिक राजदूत’ बताया, जो सात समंदर पार भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं।
विकास में प्रवासियों की भागीदारी
प्रवासियों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोग अपनी ‘कर्मभूमि’ में रहते हुए भी अपनी ‘जन्मभूमि’ के विकास को नहीं भूले हैं।
- प्रवासी राजस्थानी दिवस: मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 10 दिसंबर 2025 को जयपुर में आयोजित प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस ने दुनिया भर के राजस्थानियों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।
- जन्मभूमि विकास: ‘कर्मभूमि से जन्मभूमि’ जैसे अभियानों के माध्यम से प्रवासी अब सीधे तौर पर प्रदेश की प्रगति में भागीदार बन रहे हैं।
ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट का निमंत्रण
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कृषि और तकनीक क्षेत्र में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रवासियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया:
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- आयोजन: आगामी 23 से 25 मई को राजस्थान में ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट’ का आयोजन होने जा रहा है।
- अपील: उन्होंने प्रवासियों से आह्वान किया कि वे इस मीट में बड़ी संख्या में भाग लें और राजस्थान के कृषि परिदृश्य को बदलने में सहयोग करें।
”हमारे प्रवासी भाई-बहन अपनी माटी से दूर होकर भी राजस्थान की सुगंध को पूरी दुनिया में फैला रहे हैं। आपकी मेहनत और संस्कार ही राजस्थान की असली पहचान हैं।”
— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में बेंगलुरु और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी परिवार मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी लोक कलाओं और उत्साह से लघु राजस्थान का दृश्य जीवंत कर दिया।