जयपुर, 1 जुलाई / नरेश गुनानी /मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन और राज्य सरकार की सकारात्मक पहल से करौली जिले के पांचना बांध के पानी के वितरण को लेकर चला आ रहा 20 वर्ष पुराना विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। जयपुर के शिक्षा संकुल में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता संपन्न हुआ। सभी जनप्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में इस सहमति पर हस्ताक्षर किए।
क्या था 20 साल पुराना विवाद?
पांचना बांध की कुल क्षमता 2100 एमसीएफटी है, जिससे लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकती है। हालांकि, वर्ष 2006 के बाद से ही बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा पा रहा था। गुडला क्षेत्र सहित इसके आस-पास के 21 राजस्व गांवों के किसान लगातार मांग कर रहे थे कि जब तक बांध से लिफ्ट सिंचाई परियोजना के माध्यम से उनके गांवों को पानी नहीं दिया जाता, तब तक वे नहरों में जल प्रवाह की अनुमति नहीं देंगे। पिछले दो दशकों से इस मांग को लेकर गतिरोध बना हुआ था, लेकिन इससे पहले समाधान के कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए थे।
बजट घोषणा से खुला समाधान का रास्ता
इस विवाद को खत्म करने में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 के बजट में गुडला क्षेत्र के इन 21 राजस्व गांवों को लिफ्ट सिंचाई स्कीम के जरिए पानी देने की आधिकारिक घोषणा की थी।
इस घोषणा के बाद धरातल पर काम भी शुरू हो गया:
- नहरों की मरम्मत: नहरी तंत्र को दोबारा चालू करने के लिए 11.50 करोड़ रुपए की लागत से मरम्मत कार्य शुरू किया गया, जो अब पूरा होने की कगार पर है।
- सरकार का आश्वासन: जल संसाधन मंत्री ने बैठक में भरोसा दिलाया कि इस बजट घोषणा को पूरी तरह और समय पर धरातल पर उतारा जाएगा।
जल्द शुरू होगी टेस्टिंग, 7 दिन में तय होगी पानी छोड़ने की तारीख
लिखित समझौते के बाद जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि सरकार ने दोनों पक्षों की जायज मांगों को स्वीकार कर लिया है। अब आगामी 7 दिनों के भीतर विभाग यह तारीख तय कर लेगा कि बांध से पानी कब छोड़ा जाना है। इसके साथ ही नहरी तंत्र का तकनीकी आकलन करने के लिए जल्द ही टेस्टिंग (जल प्रवाह) शुरू की जाएगी। कमांड क्षेत्र के भीतर लिफ्ट योजना के जरिए सिंचाई तंत्र को मजबूत करने का काम भी जल्द शुरू होगा।
बैठक में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने सभी पक्षों से नहरों में जल्द पानी छोड़े जाने में सहयोग की अपील की। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने दो दशक पुराने इस संवेदनशील विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और किसानों से क्षेत्र में आपसी भाईचारा व सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया।
प्रशासन और किसान संगठनों की रही मौजूदगी
इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान प्रशासनिक और पुलिस विभाग के आला अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने अब तक की कार्रवाई और तकनीकी पहलुओं से सभी को अवगत कराया। इनमें शामिल थे:
- अभय कुमार (अतिरिक्त मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग)
- संजीव नार्जरी (ए.डी.जी.पी. डायरेक्टर, आरपीए)
- कृष्ण कुणाल (शासन सचिव, ग्रामीण विकास विभाग)
- कैलाश चन्द बिश्नोई (महानिरीक्षक, भरतपुर)
- नलिनी कठोतिया (संभागीय आयुक्त, भरतपुर)
- भुवन भास्कर (मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग)
- करौली और सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक
समझौता वार्ता के अंत में गुडला संघर्ष समिति, ग्रामोत्थान संस्था और गंभीर नदी जल बचाओ समिति के प्रतिनिधियों ने सरकार का आभार जताते हुए इस फैसले का स्वागत किया।