कम बारिश की मार: खरीफ सत्र में धान का रकबा 3% घटा, कुल बुवाई 1,056.70 लाख हेक्टेयर पर सिमटी

नई दिल्ली/गनपत चौहान/देश के कई हिस्सों में मानसून की कमजोर और असमान बारिश का सीधा असर चालू खरीफ सत्र की बुवाई पर देखने को मिला है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल धान की खेती का रकबा करीब 3 प्रतिशत घटकर 405.10 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 418.29 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था।

इन राज्यों में बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित

मंत्रालय के अनुसार, धान के रकबे में आई इस गिरावट की मुख्य वजह प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी है। कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई के दौरान बारिश की भारी कमी के कारण धान का रकबा उल्लेखनीय रूप से गिरा है।

फसलवार बुवाई की स्थिति (21 अगस्त तक के आंकड़े)

  • दलहन में मामूली राहत: दलहन फसलों के रकबे में हल्का सुधार देखा गया है। यह पिछले साल के 112.14 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 113.63 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
  • मोटे अनाज (श्री अन्न): मोटे अनाजों की बुवाई में गिरावट आई है। इसका रकबा 179.81 लाख हेक्टेयर से घटकर 176.36 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ।
  • तिलहन: तिलहन का क्षेत्र भी मामूली कमी के साथ 188.69 लाख हेक्टेयर से घटकर 188.37 लाख हेक्टेयर पर आ गया है।
  • नकदी फसलें (कपास व गन्ना): कपास का रकबा 108.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 108.45 लाख हेक्टेयर और गन्ने का रकबा 58.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 58.44 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ।

कुल खरीफ रकबे में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक की गिरावट

21 अगस्त तक देश भर में सभी प्रमुख खरीफ फसलों का कुल रकबा घटकर 1,056.70 लाख हेक्टेयर पर आ गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी समान अवधि में कुल 1,072.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, धान के रकबे में आई कमी यदि आगामी दिनों में पूरी नहीं हुई, तो इसका असर कुल खाद्यान्न उत्पादन और बाजार कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

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