कमजोर मानसून व अल नीनो की चुनौती से निपटने को तैयार सरकार, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेश किया ‘सुरक्षा कवच’ एक्शन प्लान

नई दिल्ली, 23 जून/ गनपत चौहान/अल नीनो के संभावित प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने देश की कृषि, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक व्यापक और बहुस्तरीय आकस्मिक योजना (Contingency Plan) तैयार की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की तैयारियों का ब्योरा देते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

​1. तकनीकी सलाह और डिजिटल माध्यमों से किसानों का मार्गदर्शन

​किसानों तक सटीक और समय पर जानकारी पहुंचाना इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और एग्रो-मौसम सलाह इकाइयों को जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

​वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अनुसार बुवाई, फसल बदलाव और इनपुट उपयोग के त्वरित निर्णय लेने के लिए निम्नलिखित माध्यमों पर विशेष जोर दिया गया है:

  • एग्रो-मेट एडवाइजरी और रियल-टाइम वेदर अपडेट्स।
  • SMS और व्हाट्सऐप मैसेजेस के जरिए सीधी सूचनाएं।
  • कॉल सेंटर्स, रेडियो और टीवी चैनलों का व्यापक उपयोग।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लगातार मार्गदर्शन।

​2. पशुधन और चारा: संभावित संकट के लिए एडवांस सप्लाई चेन

​कमजोर मानसून के कारण उत्पन्न होने वाले चारे के संभावित संकट को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों या जिलों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहाँ से कमी वाले क्षेत्रों के लिए अग्रिम (अडवांस) सप्लाई योजना बनाई जा रही है।

​इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • निगरानी और स्टॉकिंग: चारे की स्टॉकिंग, वैकल्पिक चारे के स्रोत और सप्लाई चेन को पहले से ही प्लान किया जा रहा है ताकि पशुपालकों को अचानक कोई समस्या न आए।
  • कालाबाज़ारी पर रोक: चारे की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करेंगी।

​3. किसानों की वित्तीय सुरक्षा: PMFBY, KCC और PM-किसान का ‘त्रिशूल’

​केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल फसल और पानी का प्रबंधन ही काफी नहीं है, बल्कि संकट के समय किसानों की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए तीन प्रमुख योजनाओं को मिलाकर एक “संकट-सहारा” तंत्र तैयार किया गया है:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): संभावित रूप से प्रभावित जिलों में बीमा कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि फसल नुकसान होने पर किसानों को समय पर क्लेम (मुआवज़ा) मिल सके।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): जिन किसानों के पास अभी तक केसीसी नहीं है, उनके कार्ड युद्ध स्तर पर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पुनर्बुवाई या अन्य इनपुट के लिए उनके पास संसाधनों की कमी न हो।
  • PM-किसान सम्मान निधि: हाल ही में जारी की गई किस्त की राशि का उपयोग किसान खाद, बीज और अन्य आवश्यक कृषि इनपुट खरीदने के लिए कर सकते हैं।

​4. मल्टी-टियर समन्वय और ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ का गठन

​आकस्मिक योजना का जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र से लेकर गांव स्तर तक एक मल्टी-टियर समन्वय फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। जिला कलेक्टर, कृषि विभाग, जल संसाधन, ग्रामीण विकास और पशुपालन विभाग के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की व्यवस्था की जा रही है।

  • कंट्रोल रूम की स्थापना: दिल्ली में “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” और “Crop Weather Watch Group” का गठन किया गया है, जो मानसून की प्रगति और फसल की स्थिति का लगातार विश्लेषण कर रहे हैं।
  • साप्ताहिक समीक्षा: राज्यों ने भी अपने नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। वर्तमान में हर सप्ताह सचिव स्तर पर और स्वयं केंद्रीय मंत्री द्वारा प्रत्येक मंगलवार को इन परिस्थितियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है।

​5. रिकॉर्ड उत्पादन लक्ष्य, भंडारण और मजबूत खाद्य सुरक्षा

​खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर देश पूरी तरह सुरक्षित है। आंकड़ों के अनुसार:

    • ​वर्ष 2025 खरीफ के लिए रखे गए धान, मक्का और कुल खाद्यान्न के लक्ष्यों को पहले ही हासिल या पार किया जा चुका है।
    • ​वर्ष 2026 खरीफ के लिए 176 मिलियन टन खाद्यान्न का लक्ष्य रखा गया है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), मानसून और बाजार की मांग के आकलन पर आधारित है।
    • ​चावल और गेहूं का बफर स्टॉक बेहद मजबूत स्थिति में है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है।

“कमजोर मानसून की संभावित स्थिति के बावजूद हमारी तैयारी ऐसी है कि हम इस चुनौती का सामना मिलकर करेंगे। घबराने की नहीं, बल्कि तैयारी और सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत है। केंद्र, राज्य, वैज्ञानिक और किसान मिलकर अल नीनो की चुनौती को भी एक अवसर में बदल देंगे।”

शिवराव सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री

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