कपास पर आरसीएम हटाने की मांग: कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से आज मिलेंगे मंडी व्यापारी

रिपोर्ट योगेश शर्मा 

जयपुर। कपास व्यापार में जीएसटी की तकनीकी विसंगतियों और आरसीएम (रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म) के चलते व्यापारियों और किसानों के सामने आ रही समस्याओं को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल (बीयूवीएम) ने मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में शनिवार सुबह 10 बजे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमण्डल केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से उनके निवास पर मुलाकात करेगा।

तकनीकी खामी: किसान पर जीएसटी और व्यापारियों का संकट

​बीयूवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने मुलाकात से पूर्व बताया कि कपास पूरी तरह से कृषि उत्पाद है और इसका उत्पादक किसान है। मौजूदा नियमों की तकनीकी खामी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा:

  • किसानों का पक्ष: नियमानुसार किसान पर जीएसटी का कोई भी प्रावधान प्रभावी नहीं है।
  • आरसीएम की उलझन: चूंकि किसान का माल ‘कच्चा आढ़तिया’ (कमीशन एजेंट) बेचता है, ऐसे में आरसीएम जमा कराने की बाध्यता आढ़तिया पर डाल दी गई है। यह कानूनन गलत है क्योंकि आढ़तिया केवल किसान के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
  • पारदर्शिता का तर्क: गुप्ता के अनुसार, कच्चे आढ़तिये ने बिल बनाकर खरीददार, जिनिंग मिल और उपभोक्ताओं से विधिवत जीएसटी वसूल किया है और सरकारी खजाने में जमा कराया है। अतः इसमें किसी भी प्रकार की कर चोरी (टैक्स चोरी) की संभावना नहीं है।

‘भूतलक्षी प्रभाव’ से राहत की मांग

​प्रतिनिधिमण्डल कानून मंत्री से यह विशेष आग्रह करेगा कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और कानूनी टिप्पणी के साथ इसे जीएसटी काउंसिल और वित्त मंत्रालय को भिजवाएं। व्यापारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. आरसीएम की समाप्ति: कपास पर लागू आरसीएम के प्रावधान को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
  2. बैक डेट से राहत: इस तकनीकी खामी को ‘भूतलक्षी प्रभाव’ (Retrospective effect) से सुधारा जाए ताकि पुराने मामलों में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी विवादों से राहत मिल सके।
  3. कानूनी स्पष्टता: यह स्पष्ट किया जाए कि जब उत्पादक (किसान) जीएसटी के दायरे से बाहर है, तो उसके बिहाफ पर काम करने वाले आढ़तिया पर आरसीएम का बोझ नहीं डाला जा सकता।

कामां मंडी और बीयूवीएम के प्रतिनिधि रहेंगे मौजूद

​कानून मंत्री के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में कामां मंडी का प्रतिनिधिमण्डल भी शामिल होगा। इसके अलावा, बीयूवीएम राजस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष मोहन सुराणा भी मौजूद रहकर व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखेंगे।

​बाबूलाल गुप्ता ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस विसंगति को दूर कर किसान और व्यापारी, दोनों को राहत प्रदान करेगी, ताकि मंडी व्यापार सुचारू रूप से चल सके।

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