कच्छ क्षेत्र को बड़ी सौगात: भारतीय रेलवे ने 493 करोड़ रुपये की आदिपुर-भुज रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को दी मंजूरी

गांधीनगर | आर बी चतुर्वेदी 

भारतीय रेलवे ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में रेल नेटवर्क को मजबूत करने और परिवहन क्षमता को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने पश्चिमी रेलवे के अंतर्गत आने वाले आदिपुर-भुज खंड (49 किमी) के दोहरीकरण (Double Line) की महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस पूरी परियोजना पर 493 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

​यह मंजूरी भारतीय रेलवे के मौजूदा दोहरीकरण, तिहरीकरण और नेटवर्क सुधार कार्यों के माध्यम से क्षमता वृद्धि कार्यक्रम के तहत दी गई है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस रेल खंड के दोहरीकरण से कच्छ क्षेत्र में यात्री और माल ढुलाई दोनों को भारी बढ़ावा मिलेगा।

​परियोजना की आवश्यकता और भविष्य की चुनौतियाँ

​वर्तमान में आदिपुर-भुज खंड एक सिंगल-लाइन रूट है। गांधीधाम-नालिया कॉरिडोर पर स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में कई अन्य रेलवे अवसंरचना परियोजनाएं चल रही हैं, जिससे आने वाले समय में यहाँ यातायात में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।

​एक अनुमान के मुताबिक, यदि इस लाइन की क्षमता नहीं बढ़ाई गई, तो वर्ष 2029-30 तक इस खंड की वर्तमान क्षमता का उपयोग बढ़कर 123 प्रतिशत हो जाएगा। इस संभावित दबाव और परिचालन संबंधी बाधाओं को समय रहते दूर करने के लिए इस दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी दी गई है।

​इस खंड को प्रभावित करने वाली अन्य प्रमुख परियोजनाएं:

  • ​भुज-नालिया गेज रूपांतरण (Gauge Conversion)
  • ​नालिया-वायोर लाइन का विस्तार
  • ​नालिया-जाखौ, वायोर-लखपत और देशालपार-लूना को जोड़ने वाली नई रेलवे लाइनें

​इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भुज-आदिपुर खंड पर ट्रेनों का दबाव काफी बढ़ने वाला है, जिसके लिए यह दोहरीकरण बेहद जरूरी है।

​परियोजना के मुख्य लाभ और प्रभाव

​इस 49 किमी लंबे खंड के दोहरीकरण से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे:

​1. यात्री सेवाओं में विस्तार

  • ​इस परियोजना के पूरा होने से प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो अतिरिक्त यात्री ट्रेन सेवाओं का संचालन संभव हो सकेगा।
  • ​इससे कच्छ और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों के लिए यात्रा अधिक सुगम, आरामदायक और समय की बचत करने वाली होगी।

​2. माल ढुलाई और औद्योगिक संपर्क को मजबूती

  • ​दोहरी रेल लाइन की मदद से प्रति वर्ष अतिरिक्त 12 मिलियन टन (MTPA) माल ढुलाई की जा सकेगी।
  • ​इससे पश्चिमी गुजरात में लॉजिस्टिक्स (रसद) व्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय उद्योगों को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

​3. परिचालन दक्षता और राजस्व में वृद्धि

    • ​मार्ग पर ट्रेनों की भीड़ कम होगी और रेल परिचालन की विश्वसनीयता में सुधार होगा।
    • ​यात्रियों और माल ढुलाई में होने वाली इस वृद्धि से भारतीय रेलवे के लिए अतिरिक्त राजस्व (Revenue) उत्पन्न होगा।

भारतीय रेलवे का संकल्प:

इस परियोजना की मंजूरी के साथ ही भारतीय रेलवे ने भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) बुनियादी ढांचे के निर्माण, कनेक्टिविटी में सुधार और देश की बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। यह परियोजना कच्छ क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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