गौरव कोचर
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में भू-राजनीतिक तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बराकाह (Barakah) परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए एक बड़े ड्रोन हमले के बाद सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। इस अप्रत्याशित हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI), दोनों ही लगभग 2% से अधिक बढ़कर पिछले दो हफ्तों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
तेल की कीमतों में आया उबाल
सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ही कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई:
- ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव $2.01 (1.84%) की तेजी के साथ $111.27 प्रति बैरल पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान एक समय यह $112 के स्तर को भी छू गया था, जो 5 मई के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
- WTI क्रूड: अमेरिकी क्रूड भी $2.33 (2.21%) की बढ़त लेकर $107.75 प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया, जो अप्रैल के आखिर के बाद का इसका सबसे ऊपरी स्तर है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भी कच्चे तेल की कीमतों में 7% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई थी, और इस नए हमले ने आग में घी का काम किया है।
UAE के परमाणु संयंत्र को बनाया गया निशाना
यूएई के अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को देश के प्रतिष्ठित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास ड्रोन से हमला किया गया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि मुख्य संयंत्र को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही किसी प्रकार के रेडिएशन (विकिरण) लीक या जानमाल के नुकसान की खबर है।
यूएई सरकार ने इसे एक “खतरनाक उकसावे वाला कृत्य” और “आतंकवादी हमला” करार देते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। अधिकारियों ने कहा है कि देश इस हमले की पूरी जांच कर रहा है और इसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है। यूएई ने इस हमले के पीछे ईरान या उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों का हाथ होने की आशंका जताई है।
तनाव बढ़ने के मुख्य कारण
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण पिछले करीब 80 दिनों से होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक जलमार्ग आंशिक रूप से प्रभावित है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक आपूर्ति पहले से ही बेहद तंग थी।
- शांति वार्ता में गतिरोध: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद भी मिडिल ईस्ट संकट को सुलझाने का कोई ठोस रास्ता नहीं निकल सका। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि “समय हाथ से निकलता जा रहा है”, जिससे बाजार में सैन्य टकराव की आशंका और गहरी हो गई है।
- सऊदी अरब में भी अलर्ट: यूएई के साथ-साथ सऊदी अरब ने भी अपनी हवाई सीमा में इराक की तरफ से घुस रहे तीन ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था हाई-अलर्ट पर है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
कच्चे तेल की इस आसमान छूती कीमत का सबसे बड़ा खामियाजा भारत जैसे बड़े आयातक देशों को भुगतना पड़ सकता है:
- कमजोर होता रुपया: कच्चे तेल के महंगे होने और डॉलर की मांग बढ़ने के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹96 के रिकॉर्ड निचले स्तर के पास पहुंच गया है।
- महंगाई का नया बोझ: तेल की कीमतों में उछाल के कारण घरेलू बाजार में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जो पिछले लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी वृद्धि है। इससे आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई महंगी होने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर में 25 से 30 बेसिस प्वाइंट्स का उछाल आने की आशंका है।
- शेयर बाजार में गिरावट: वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर रखने की चिंताओं के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स और निफ्टी) भारी गिरावट के साथ खुले।