कंवरलाल मीणा की विधानसभा सदस्यता रद्द, अंता सीट पर होंगे उपचुनाव: राजस्थान की सियासत में नई हलचल
Edited By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 23, 2025
जयपुर।
राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कंवरलाल मीणा की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। अब अंता विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट से तीन साल की सजा मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिसे लेकर लंबे समय से राजनीतिक घमासान चल रहा था।
सुप्रीम कोर्ट से सजा बरकरार, आखिरकार सदस्यता गई
अंता से विधायक कंवरलाल मीणा को एक आपराधिक मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था, जिसके बाद मीणा ने अदालत में सरेंडर कर दिया। भारतीय संविधान के अनुसार, किसी भी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष की ओर से तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई थी, जिससे विपक्ष हमलावर था।

कांग्रेस का दबाव और हाईकोर्ट की याचिका बनी निर्णायक
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मामले को लेकर सरकार और विधानसभा अध्यक्ष पर सवाल खड़े किए थे। जूली ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की, जिसमें विधायक की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई। विपक्ष का आरोप था कि सरकार जानबूझकर मामले को लटका रही है और सत्ताधारी दल विधायक को बचा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष का फैसला
लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और कानूनी सलाह के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने आखिरकार कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द करने का निर्णय लिया। विधानसभा सचिवालय की ओर से इसकी औपचारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसके साथ ही अंता सीट अब रिक्त हो गई है, और जल्द ही चुनाव आयोग उपचुनाव की घोषणा करेगा।
अंता उपचुनाव: राजनीतिक दलों की बढ़ी सक्रियता
अंता सीट पर उपचुनाव की घोषणा से पहले ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
- कांग्रेस इसे नैतिक जीत के तौर पर देख रही है और इसे संविधान की रक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता बता रही है।
- वहीं, बीजेपी अब नए उम्मीदवार के चयन की तैयारी में जुट गई है और अपने कोर वोट बैंक को साधने में लगी है।
जनता के मुद्दे होंगे अहम
अंता विधानसभा उपचुनाव में स्थानीय मुद्दे जैसे बेरोजगारी, शिक्षा, सिंचाई सुविधा, किसानों की समस्याएं और मूलभूत विकास कार्यों पर खास फोकस रहेगा। दोनों ही दल अब जनता को साधने के लिए कमर कस चुके हैं।
