योगेश शर्मा
जयपुर। राजस्थान की राजनीति और सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एवं पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर (AICC ओबीसी विभाग) राजेन्द्र सेन ने पारंपरिक कामगार जातियों की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला स्वर्णकार समाज और ओबीसी वर्ग का श्रमिक तबका आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
पारंपरिक व्यवसायों पर मंडरा रहा खतरा
राजेन्द्र सेन ने जयपुर में जारी एक बयान में कहा कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और केंद्र सरकार की कुछ नीतियों के कारण छोटे कारीगरों और पारंपरिक शिल्पकारों के हाथ से काम छिनता जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर दी गई सलाहों और बाजार के समीकरणों को छोटे कामगारों के लिए घातक बताया।
सेन के अनुसार, संकट के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- बाजार में भारी मंदी: छोटे व्यापारियों और कारीगरों की आय का स्तर न्यूनतम हो गया है।
- बेकाबू महंगाई: घरेलू खर्चों और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि ने बचत को खत्म कर दिया है।
- नीतिगत प्रभाव: प्रधानमंत्री की कुछ आर्थिक सलाहों और नीतियों से पारंपरिक व्यवसायों में गिरावट आई है।
प्रधानमंत्री राहत कोष से विशेष पैकेज की मांग
राजेन्द्र सेन ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे इस संकट का संज्ञान लें और प्रधानमंत्री राहत कोष से स्वर्णकार समाज एवं ओबीसी की अन्य कामगार जातियों (जैसे कुम्हार, लोहार, सुथार, सेन समाज आदि) के लिए विशेष राहत राशि की घोषणा करें।
”देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ये श्रमिक और कारीगर आज रोजी-रोटी के लिए मोहताज हैं। यदि सरकार ने समय रहते इन्हें संरक्षण और आर्थिक संबल प्रदान नहीं किया, तो लाखों परिवारों के सामने जीवन-यापन का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।” — राजेन्द्र सेन
महंगाई पर लगाम और संरक्षण की जरूरत
राजेन्द्र सेन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ योजनाओं के प्रचार से कामगारों का भला नहीं होगा। सरकार को महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक कामगार वर्ग को संरक्षण देना सरकार की प्राथमिक संवैधानिक जिम्मेदारी है।