ओडिशा का नया तटीय राजमार्ग: आध्यात्मिक यात्राओं और तटीय पर्यटन क्रांति का प्रवेश द्वार

नई दिल्ली / आसिम अमिताव बिस्वाल/ओडिशा के तटीय क्षेत्र में ढांचागत विकास को एक नई दिशा देते हुए रामेश्वर-पारादीप तटीय राजमार्ग के निर्माण की घोषणा की गई है। 160.18 किलोमीटर लंबा यह गलियारा राज्य के तटीय इलाकों में कनेक्टिविटी की तस्वीर को पूरी तरह से बदल देगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 8,300.79 करोड़ रुपये की कुल लागत से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विकास किया जा रहा है। यह राजमार्ग खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, धार्मिक, पर्यटन और आर्थिक स्थलों के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित होगा।

​तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइन की गई इस परियोजना में रामेश्वर से कोणार्क तक चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड राजमार्ग और कोणार्क से पारादीप तक पक्के शोल्डर वाला दो लेन का राजमार्ग शामिल है। इस पूरे मार्ग की डिजाइन गति सीमा 100 किमी/घंटा निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य पूरा होने पर, इस कॉरिडोर से रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होने की उम्मीद है, जिससे यात्रियों की आवाजाही के साथ-साथ माल ढुलाई कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार होगा।

​आध्यात्मिक विरासत को मिलेगा नया आयाम

​यह नया तटीय राजमार्ग ओडिशा के कुछ सबसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक स्थलों तक त्वरित पहुंच प्रदान करके धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख उत्प्रेरक बनेगा।

  • ​तीर्थयात्रा होगी सुगम: यह कॉरिडोर पुरी के जगन्नाथ मंदिर, ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर और पूजनीय रामचंडी मंदिर के बीच संपर्क को मजबूत करेगा। इससे हर साल ओडिशा आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
  • ​यात्रा अनुभव में सुधार: बेहतर सड़क अवसंरचना से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और अधिक आरामदायक आवागमन सुनिश्चित होगा।
  • ​वैश्विक स्तर पर जुड़ाव: क्षेत्र में आकार ले रही आगामी हवाई अड्डा अवसंरचना से ओडिशा की एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थिति और मजबूत होगी, जिससे भारत और विश्व भर से आने वाले आगंतुकों के लिए यहां पहुंचना बेहद सरल हो जाएगा।

​यह राजमार्ग यह दर्शाता है कि कैसे आधुनिक बुनियादी ढांचा लोगों को ऐतिहासिक मंदिरों, परंपराओं और आध्यात्मिक केंद्रों से जोड़कर देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में सहायता कर सकता है।

​पुरी से पारादीप: पर्यटन का नया सर्किट

​रामेश्वर-पारादीप कॉरिडोर ओडिशा के पूर्वी तटरेखा के साथ समुद्र तटों, विरासत स्थलों, जैव विविधता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़ने वाला एक नया तटीय पर्यटन प्रवेश द्वार बनने के लिए तैयार है।

​पुरी, कोणार्क और पारादीप के बीच बेहतर संपर्क के साथ, ये गंतव्य एक एकीकृत पर्यटन सर्किट के रूप में उभरेंगे। यह सर्किट यात्रियों को एक संपूर्ण तटीय अनुभव प्रदान करेगा—जिसमें आध्यात्मिक विरासत और प्राचीन वास्तुकला से लेकर सुंदर समुद्र तट और प्राकृतिक इकोसिस्‍टम शामिल हैं।

​यह राजमार्ग समुद्र तट पर्यटन, पर्यावरण-पर्यटन और प्रकृति-आधारित यात्रा के लिए नए अवसर खोलेगा। साथ ही वन्यजीव क्षेत्रों और प्रसिद्ध गहिरमाथा कछुआ अंडा-प्रजनन स्थलों सहित महत्वपूर्ण पारिस्थितिक स्थलों तक आसान पहुंच प्रदान करेगा। बेहतर संपर्क व्यवस्था से ओडिशा की अनूठी तटीय जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों के बारे में जागरूकता बढ़ेगी, जिससे जिम्मेदार पर्यटन मॉडलों को बढ़ावा मिलेगा।

​स्थानीय अर्थव्यवस्था और तटीय विकास को गति

​यह नया राजमार्ग गलियारे के किनारे होटल, होमस्टे, रेस्तरां, हस्तशिल्प बाजार और पर्यटन आधारित व्यवसायों के विकास को प्रोत्साहित करके स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा।

​आर्थिक एकीकरण: प्रधानमंत्री गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुरूप, यह परियोजना 9 आर्थिक केंद्रों और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ेगी, जिससे ओडिशा का आर्थिक नेटवर्क और मजबूत होगा।

 

​इससे पारादीप बंदरगाह, पुरी रेलवे स्टेशन, पुरी हवाई अड्डा और अन्य क्षेत्रीय आर्थिक केंद्रों जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों तक पहुंच में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा, जो राज्य के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

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