ऑपरेशन शटरडाउन: सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने वाला अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह ध्वस्त
झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नोडल ऑपरेटर समेत 6 गिरफ्तार, ₹1 करोड़ से अधिक की राशि फ्रीज — पीएम किसान निधि, जनआधार व आपदा प्रबंधन पोर्टल में सेंधमारी से करोड़ों की धोखाधड़ी उजागर
गौरव कोचर •
जयपुर, 28 ,अक्टूबर।
राजस्थान पुलिस ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। झालावाड़ पुलिस द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन शटरडाउन” के तहत एक ऐसे अंतर्राज्यीय संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है जो केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में सेंध लगाकर करोड़ों रुपए की राजकोषीय धोखाधड़ी कर रहा था।
यह गिरोह पीएम किसान सम्मान निधि, जनआधार पोर्टल, राज एसएसपी (सामाजिक सुरक्षा पेंशन) एवं आपदा प्रबंधन विभाग के डीएमआईएस पोर्टल में हैकिंग के जरिए घुसपैठ कर पात्रता से बाहर लोगों के खातों में सरकारी राशि स्थानांतरित करवा रहा था।
अभियान की शुरुआत और गिरफ्तारी
ऑपरेशन की शुरुआत 22 अक्टूबर को हुई थी, जब प्रारंभिक कार्रवाई में 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अभियान को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने अब 6 नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 2 आरोपियों को डिटेन किया गया है।
एसपी अमित कुमार के अनुसार, अब तक 11,000 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को डेबिट फ्रीज किया गया है, जिनमें करीब ₹1 करोड़ की राशि पाई गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान व भूमिका
- मोहम्मद लईक पुत्र मोहम्मद रफीक — जयपुर निवासी, पीएम किसान सम्मान निधि के स्टेट नोडल ऑफिस का ऑपरेटर। अपनी ऑफिसियल आईडी का दुरुपयोग कर अनाधिकृत आईडी बनाकर अपात्र व्यक्तियों की लैंड सीडिंग व अकाउंट एक्टिवेशन करता था।
- सुभाष पुत्र रामसॅरन (दिल्ली) — उत्तराखंड व यूपी के अपात्र लाभार्थियों का डेटा उपलब्ध कराता था।
- मोहम्मद शाहीद खान पुत्र निजामुद्दीन (भरतपुर) — भूमि विकास बैंक में पूर्व संविदाकर्मी, फर्जी एक्टिवेशन और लैंड सीडिंग में शामिल।
- रोहित कुमार पुत्र चरण सिंह (जालंधर, पंजाब) — पीएम किसान निधि की क्लोन वेबसाइट तैयार करने में भूमिका।
- संदीप शर्मा पुत्र राधेश्याम (जालंधर) — सरकारी योजनाओं की क्लोन वेबसाइट डेवलपमेंट में शामिल।
- सुनंत शर्मा पुत्र सुदर्शन शर्मा — गिरोह का मुख्य हैंडलर।
डिटेन आरोपियों में रमेशचंद (फलौदी कलेक्ट्रेट कर्मचारी) और भागचंद (दौसा) शामिल हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर अपात्र लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन एक्टिवेशन करवाए।
बरामद सामग्री और डिजिटल सबूत
पुलिस ने अभियुक्तों के ठिकानों से
- ₹53 लाख नकद,
- नोट गिनने की मशीन,
- हजारों चेक बुक, पासबुक और एटीएम कार्ड,
- 35 से अधिक लैपटॉप, 70 मोबाइल फोन,
- और 11,000 से अधिक बैंक अकाउंट डिटेल्स बरामद की हैं।
साथ ही लग्जरी कारें, मोटरसाइकिलें व ट्रैक्टर भी जब्त किए गए हैं। बरामद डिजिटल डिवाइसेस में सरकारी पोर्टलों के HTML कोड्स, लॉगिन पासवर्ड और लाभार्थियों के संवेदनशील डेटा मिले हैं।
साइबर हैकिंग की कार्यप्रणाली
गिरोह का नेटवर्क बेहद तकनीकी और सुनियोजित था।
- ये अपराधी ग्रामीण क्षेत्रों से अपात्र लाभार्थियों का डेटा एकत्र करते थे।
- नोडल ऑपरेटर अपनी सरकारी आईडी से रात के समय अवैध लॉगिन कर ओटीपी बायपास कर खातों को सक्रिय करता था।
- अगले दिन ये आईडी डीएक्टिव कर दी जाती थी ताकि कोई रिकॉर्ड न बचे।
डीएमआईएस पोर्टल में सेंध के लिए गिरोह ने AePS सिस्टम की तकनीकी कमी का लाभ उठाया। उनके पास राजस्थान के कई कलेक्टरों से लेकर पटवारी स्तर तक की 1500 से अधिक एसएसओ आईडी व ईमेल आईडी मिलीं।
जनआधार व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में सेंध
बरामद उपकरणों के विश्लेषण से पता चला कि गिरोह ने
- जनआधार डेटा वैरिफिकेशन को बायपास करने वाले साइबर टूल्स विकसित किए थे,
- ई-मित्र प्लस मशीनों के सॉफ्टवेयर कोड तक पहुंच बना ली थी,
- और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के PPO ऑर्डर व बैंक अकाउंट डिटेल्स का दुरुपयोग किया।
केवल जयपुर, जोधपुर और सीकर जिलों में ही लगभग 17,000 लाभार्थियों का संदिग्ध रिकॉर्ड मिला है।
स्पेशल टास्क फोर्स की कार्रवाई
मामले की जटिलता को देखते हुए झालावाड़ पुलिस ने 6 सदस्यीय एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की, जिसमें एसओजी जयपुर, एसओजी दिल्ली, पंजाब, भरतपुर, दौसा और जोधपुर पुलिस की विशेष टीमों का सहयोग रहा।
इस संयुक्त प्रयास से ही विभिन्न राज्यों में छिपे सरकारी कर्मचारियों और साइबर तकनीक विशेषज्ञ अपराधियों को पकड़ना संभव हुआ।
फरार आरोपी और इनाम घोषणा
पुलिस अधीक्षक झालावाड़ द्वारा 5 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर ₹25,000-₹25,000 का इनाम घोषित किया गया था। इनमें से एक आरोपी भागचंद सैनी (दौसा) को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष चार फरार आरोपी हैं —
- कुलदीप ढोली (देवरी खुर्द, झालावाड़)
- नरेश सैनी (जयपुरा, बांदीकुई)
- विक्रम सैनी (लोटवाड़ा, बांदीकुई)
- राजू तंवर (छान का खेड़ा, झालावाड़)।
एसआईटी अब सरकारी धन की हेराफेरी से अर्जित अवैध संपत्तियों के चिह्नीकरण और सिस्टम में सेंधमारी की गहराई तक जांच कर रही है।
डीजीपी का संदेश
डीजीपी श्री राजीव शर्मा ने कहा कि “राजस्थान पुलिस सेवा, सुरक्षा और न्याय के प्रति निष्ठा और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। साइबर अपराध जैसे जटिल मामलों में तकनीकी क्षमता और सूझबूझ ही सबसे बड़ा हथियार है। पुलिस का यह अभियान आमजन के विश्वास को और मजबूत करेगा।”