गौरव कोचर
जयपुर, 6 मई 2026
जयपुर उत्तर जिला पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक साल से फरार चल रहे 10,000-10,000 रुपये के दो इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी महाराष्ट्र के भोले-भाले ग्रामीणों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम ठिकाने लगाते थे।
कैसे हुआ खुलासे का आगाज़?
पुलिस उपायुक्त जयपुर उत्तर करण शर्मा के अनुसार, यह मामला 18 जुलाई 2025 को तब शुरू हुआ जब उपनिरीक्षक माया मीणा को मुखबिर से सूचना मिली। पोलोविक्ट्री स्थित जैन पार्श्वनाथ ट्रेवल्स पर विजय सेण्डे के नाम से एक संदिग्ध पार्सल बुक कराया गया था। तलाशी लेने पर पार्सल से भारी मात्रा में अवैध मोबाइल सिम कार्ड, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद हुए। इस पर जालूपुरा थाने में धारा 318(4) और 61(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।
महाराष्ट्र के गाँवों में फैला था जाल
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त बजरंग सिंह और सहायक पुलिस आयुक्त राजेंद्र कुमार मीणा के निर्देशन में थानाधिकारी हवासिंह मंगावा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने महाराष्ट्र के चंद्रपुर और वर्धा जिलों में डेरा डाला। जाँच में सामने आया कि आरोपी विजय रमेश राव सेण्डे और सूर्य प्रकाश सैनी वहां की गरीब महिलाओं और ग्रामीणों को ‘लाडली बहन’ जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते थे। केवाईसी (KYC) के बहाने वे उनके सिम कार्ड और बैंक दस्तावेज ले लेते थे और फिर उन खातों का उपयोग साइबर फ्रॉड की राशि मंगाने के लिए करते थे।
रिंगस (सीकर) से हुई गिरफ्तारी
पुलिस को सूचना मिली कि मुख्य आरोपी विजय सेण्डे नागपुर से राजस्थान आया है और सीकर के रिंगस में सूर्य प्रकाश सैनी से नए खातों की जानकारी लेने मिलने वाला है। घेराबंदी कर पुलिस टीम ने दोनों को दबोच लिया।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:
- विजय रमेश राव सेण्डे: निवासी माण्डेली रोड, ज्योतिबा फुले वार्ड, बरोरा, जिला चंद्रपुर (महाराष्ट्र)।
- सूर्य प्रकाश सैनी: निवासी वार्ड नंबर 06, गाँव मावता जहाज, थाना उदयपुरवाटी, जिला झुंझुनू।
वारदात का तरीका (Modus Operandi)
आरोपी बहुत शातिर तरीके से काम करते थे। वे कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। सरकारी योजनाओं का लालच देकर उनके मोबाइल सिम, एटीएम और चेकबुक अपने पास रख लेते थे। इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट्स’ कहा जाता है, जिनका उपयोग देश भर में की गई साइबर ठगी के पैसों को घुमाने और निकालने के लिए किया जाता था।
पुलिस टीम की भूमिका
इस सफल कार्यवाही में उपनिरीक्षक राजेंद्र कुमार शर्मा, हेड कांस्टेबल अनिल कुमार, कांस्टेबल लक्ष्मीकांत, जितेंद्र सिंह, शिवराज और साइबर सेल से नन्छूराम की अहम भूमिका रही। विशेष रूप से कांस्टेबल लक्ष्मीकांत (9251) ने सूचना संकलन में विशेष योगदान दिया।
फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि साइबर ठगी के इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अब तक हस्तांतरित की गई कुल राशि का पता लगाया जा सके।