​”ऑपरेशन मोड” में रायगढ़ पुलिस: हर अपराध के लिए अलग रणनीति, SSP शशि मोहन सिंह की अगुवाई में हर मोर्चे पर सक्रिय

गणपत चौहान 

टेलीग्राफ टाइम्स रायगढ़। रायगढ़ जिला पुलिस इन दिनों केवल अपराध दर्ज करने वाली पारंपरिक व्यवस्था से आगे निकलकर, अपराध की जड़ों पर सीधा प्रहार करने वाले एक सक्रिय (Proactive) और परिणाममुखी पुलिसिंग मॉडल के रूप में उभर रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में संचालित विशेष अभियानों ने जहां अपराधियों की कमर तोड़ दी है, वहीं आम नागरिकों के भीतर सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास को एक नई मजबूती दी है।

​जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और हर प्रकार के संगठित अपराध को नेस्तनाबूद करने के लिए रायगढ़ पुलिस लगातार “ऑपरेशन मोड” में काम कर रही है। एसएसपी की विशेष रणनीतिक कार्यशैली के तहत अलग-अलग अपराधों की प्रकृति के अनुसार कस्टमाइज्ड (विशेष) अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसका सीधा असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।

​विशेष ऑपरेशन्स: हर मोर्चे पर अपराधियों की घेराबंदी

​रायगढ़ पुलिस ने गौ तस्करी, नशे के काले कारोबार, जुआ-सट्टा, कबाड़ चोरी और महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई बड़े ऑपरेशन्स शुरू किए हैं:

  • ऑपरेशन शंखनाद (गौ तस्करी पर रोक): इस अभियान के तहत गोवंश एवं कृषक मवेशियों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए पुलिस लगातार हाईवे और संवेदनशील मार्गों पर दबिश दे रही है। इसके जरिए पशु तस्करों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही है।
  • ऑपरेशन आघात (नशे के खिलाफ जंग): युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। अवैध शराब, गांजा, अफीम और प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल/इंजेक्शन की बिक्री पर पुलिस की पैनी नजर है। हाल ही में गांजा और नशीली दवाओं के सिंडिकेट का भंडाफोड़ इसी अभियान की सफलता है।
  • ऑपरेशन अंकुश (जुआ और सट्टा पर प्रहार): क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए जुआ और सट्टा खिलाने वालों के खिलाफ इस अभियान के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
  • ऑपरेशन प्रहार (अवैध कबाड़ पर नकेल): कबाड़ के अवैध कारोबार की आड़ में होने वाली चोरियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का मानना है कि कबाड़ माफिया पर चोट करने से संपत्ति संबंधी अपराधों में भारी कमी आई है।

​बदले नाम, बदली रणनीति: फरार आरोपियों पर “क्लीन हंट” और पीड़ितों के लिए “संवेदना”

​समय और परिस्थिति के अनुसार पुलिस ने अपने पुराने अभियानों को नया रूप देकर अधिक आक्रामक और मानवीय बनाया है:

‘ऑपरेशन क्लीन हंट’: लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों और स्थायी वारंटियों की धरपकड़ के लिए पहले संचालित ‘ऑपरेशन तलाश’ को अब नया नाम “ऑपरेशन क्लीन हंट” दिया गया है। इस अभियान के तहत जिला पुलिस वारंटियों को खोज-खोज कर जेल भेज रही है, जिससे अपराधियों में हड़कंप है।

‘अभियान संवेदना’: महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतते हुए पूर्व में संचालित ‘ऑपरेशन मुस्कान’ को अब “अभियान संवेदना” के रूप में नया विस्तार दिया गया है। इसके तहत गुमशुदा बालक-बालिकाओं की दस्तयाबी और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है।

 

​रिजल्ट ओरिएंटेड पुलिसिंग से मजबूत हुआ लॉ एंड ऑर्डर

​स्थानीय प्रबुद्ध जनों और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि एसएसपी शशि मोहन सिंह की कार्यप्रणाली पूरी तरह से “रिजल्ट ओरिएंटेड (परिणामोन्मुखी)” है। लगातार व्यक्तिगत मॉनिटरिंग, थानों को स्पष्ट दिशा-निर्देश और त्वरित फील्ड एक्शन के कारण ही पुलिसिंग अधिक प्रभावी नजर आ रही है।

​पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन सुनियोजित अभियानों के कारण जिले के संवेदनशील इलाकों में शांति व्यवस्था कायम है और अपराध के ग्राफ में भी सकारात्मक गिरावट दर्ज की गई है। आने वाले समय में इन सभी ऑपरेशन्स को और अधिक व्यापक और तकनीकी रूप से अपग्रेड किया जाएगा ताकि रायगढ़ जिला पूरी तरह से अपराध मुक्त और सुरक्षित बन सके।

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