ऑटो सेक्टर में आएगा उछाल! रेलवे ने माल ढुलाई किराए में की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, लंबी दूरी का भाड़ा हुआ आधा

प्रीति बालानी 

नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हो सकता है। भारतीय रेलवे ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्टेशन के लिए माल ढुलाई (Freight) दरों को 50% तक घटाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद ऑटो कंपनियों के शेयरों में हलचल तेज हो गई है और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़े बदलाव की आहट है।

​ रेल मार्ग बनेगा अब ‘ऑटो एक्सप्रेसवे’

​रेलवे मंत्रालय की इस नई नीति का उद्देश्य ट्रकों के एकाधिकार को खत्म करना और रेलवे को ऑटो परिवहन का मुख्य जरिया बनाना है।

  • किराया कटौती का गणित: 1,200 किमी से अधिक की दूरी तय करने वाले ऑटो-रैक्स पर अब ‘फ्लैट 50% डिस्काउंट’ लागू होगा।
  • क्षमता विस्तार: रेलवे ने विशेष रूप से डिजाइन किए गए NMGH वैगन्स की संख्या बढ़ाने का भी निर्णय लिया है, जो कारों और दोपहिया वाहनों को बिना किसी डैमेज के सुरक्षित ले जाने में सक्षम हैं।
  • प्रायोरिटी क्लीयरेंस: ऑटो-रैक्स को अब पैसेंजर ट्रेनों की तरह ‘ग्रीन कॉरिडोर’ दिया जाएगा ताकि डिलीवरी समय में 30% की और बचत हो सके।

​ इंडस्ट्री पर पड़ने वाले 3 सबसे बड़े प्रभाव

​1. ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार

​टाटा मोटर्स, महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स एक बड़ा खर्च होता है। किराया आधा होने से इन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (EBITDA) में 1.5% से 2.5% तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

​2. स्टॉक इन्वेंट्री का बेहतर प्रबंधन

​अभी तक डीलरशिप तक गाड़ियाँ पहुँचने में 7-10 दिन लगते थे। रेलवे के इस कदम और Dedicated Freight Corridors (DFC) के इस्तेमाल से अब यह समय घटकर मात्र 2-3 दिन रह जाएगा। इससे कंपनियों को कम इन्वेंट्री रखने की जरूरत पड़ेगी।

​3. ग्राहकों को ‘कैशबैक’ या सस्ती गाड़ियाँ

​कंपनियों पर अब गाड़ियों की कीमतों को स्थिर रखने या उनमें कटौती करने का दबाव बढ़ेगा। जानकारों का मानना है कि एंट्री-लेवल कारों पर इसका फायदा ग्राहकों को सीधे तौर पर मिल सकता है।

​ तुलनात्मक विश्लेषण: सड़क बनाम रेल

विशेषता

सड़क परिवहन (ट्रक)

रेलवे (नई नीति के बाद)

लागत (प्रति कार)

₹15,000 – ₹20,000

₹7,000 – ₹10,000

सुरक्षा

डैमेज और चोरी का जोखिम

उच्च सुरक्षा (सील्ड वैगन्स)

ईंधन दक्षता

कम (डीजल पर निर्भर)

बहुत अधिक (इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव)

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

कई राज्यों के परमिट की बाधा

सिंगल

विशेषज्ञों की राय

​”यह फैसला भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। लॉजिस्टिक्स की लागत कम होने से भारतीय गाड़ियाँ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी और अधिक प्रतिस्पर्धी (Competitive) हो जाएंगी।”

लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट

 बड़ी तस्वीर

​रेलवे की इस ‘किराया कटौती’ से न केवल महंगाई पर लगाम लगेगी, बल्कि सड़कों पर ट्रकों की भीड़ कम होने से प्रदूषण में भी कमी आएगी। यह ‘विन-विन’ स्थिति है जहाँ रेलवे को अधिक वॉल्यूम मिलेगा और ऑटो कंपनियों को कम लागत।

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