🌍 एसडीजी-6: जीवन को चलाने वाला पानी – अरबों लोगों के लिए अमृत
20 सितम्बर 2025 | संयुक्त राष्ट्र न्यूज़ की रिपोर्ट
गौरव कोचर
🔹 स्वच्छ जल का बढ़ता महत्व
निस्संदेह, स्वच्छ जल मानवीय जीवन के लिए अमृत समान है। यह केवल जीवन की मूलभूत आवश्यकता नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के स्वास्थ्य, गरिमा और विकास के अधिकार से गहराई से जुड़ा है। पानी की पर्याप्त उपलब्धता के बिना स्वास्थ्य, शिक्षा, निर्धनता उन्मूलन, लैंगिक समानता और खाद्य सुरक्षा जैसे अन्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करना असम्भव है। यही कारण है कि एसडीजी-6 (SDG-6) को सतत विकास के लिए केंद्रीय लक्ष्य माना गया है।

🔹 उत्तराखंड की प्रेरक पहल
भारत के उत्तराखंड राज्य ने हाल के वर्षों में स्वच्छ जल उपलब्धता का उदाहरण पेश किया है। राज्य के 22 अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लगभग 5,44,000 लोग—यानी 95 प्रतिशत घरों—को हर दिन 16 से 24 घंटे तक स्वच्छ पाइप से पानी मिल रहा है। इस परिवर्तन ने महिलाओं और बच्चों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है।
- महिलाएँ अब घंटों पानी लाने की मशक्कत से मुक्त होकर रोजगार और स्वरोजगार में समय दे पा रही हैं।
- बच्चे समय पर स्कूल पहुँचते हैं और अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
यह मॉडल देश के अन्य हिस्सों और दुनिया भर में जल आपूर्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। -

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🔹 वैश्विक जल संकट की कठोर हकीकत
सकारात्मक पहल के बावजूद, दुनिया के करोड़ों लोग आज भी सुरक्षित जल और स्वच्छता सेवाओं से वंचित हैं। संयुक्त राष्ट्र की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार:
- 2 अरब 20 करोड़ लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है।
- 3 अरब 40 करोड़ लोगों के पास सुरक्षित स्वच्छता सेवाएँ नहीं हैं।
- 1 अरब 70 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें घर पर बुनियादी स्वच्छता सुविधाएँ भी नसीब नहीं हैं।
यह संकट न केवल स्वास्थ्य संबंधी आपदाओं को जन्म देता है, बल्कि सामाजिक असमानता और आर्थिक पिछड़ेपन को भी गहराता है।
🔹 बढ़ती मांग और जल दबाव
जनसंख्या वृद्धि, तेज़ नगरीकरण और कृषि, उद्योग व ऊर्जा क्षेत्रों की बढ़ती ज़रूरतों के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है।
- 2015 से वैश्विक जल दबाव (Water Stress) लगभग 18 प्रतिशत पर स्थिर है।
- हर 10 में से 1 व्यक्ति उच्च या गंभीर जल दबाव वाले क्षेत्रों में रह रहा है।
- कुछ क्षेत्रों में यह दबाव 75 प्रतिशत से भी अधिक पहुँच चुका है।
🔹 धीमी प्रगति लेकिन उम्मीद बरकरार
इन चुनौतियों के बावजूद दुनिया ने कुछ महत्वपूर्ण प्रगति भी दर्ज की है।
- 2015 से 2024 के बीच सुरक्षित पेयजल तक पहुँच रखने वाली विश्व आबादी 68 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई है।
- कई देशों ने जल प्रदूषण कम करने और जल संरक्षण के लिए नवाचार तकनीकों को अपनाया है।
🔹 क्यों ज़रूरी है जल और स्वच्छता?
सुरक्षित पानी और स्वच्छता तक पहुँच को संयुक्त राष्ट्र ने मौलिक मानव अधिकार माना है। इसका महत्व केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह—
- निर्धनता उन्मूलन
- खाद्य सुरक्षा और पोषण
- पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण
- शिक्षा और लैंगिक समानता
- शान्ति और मानवाधिकार
जैसे क्षेत्रों की प्रगति के लिए भी बुनियादी शर्त है।
🔹 आगे की राह
जल संकट को हल करने के लिए देशों को अब तेज़, ठोस और सहयोगपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता है। इसमें शामिल है:
- जल संसाधनों का सतत प्रबंधन
- वर्षा जल संचयन और पानी के पुनर्चक्रण को बढ़ावा
- सीमा-पार जल संसाधनों के साझा प्रबंधन पर वैश्विक सहयोग
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता ढाँचे को मजबूत करना
एसडीजी-6 की प्राप्ति केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व की शर्त है। उत्तराखंड जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि सामुदायिक सहभागिता, सरकारी प्रतिबद्धता और तकनीकी नवाचार से जल संकट को कम किया जा सकता है। यदि दुनिया इसी दिशा में एकजुट होकर काम करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की हर बूंद को बचाना संभव है।

