एसटीपी की पाइप लाइन फटी, गांव में फैली बदबू—ग्रामीणों का हंगामा, ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया, बोले- दो दिन में समाधान नहीं तो हाईकोर्ट जाएंगे
| लोकेंद्र सिंह शेखावत
जयपुर। डिग्गी-मालपुरा रोड पर स्थित गांव रातल्या में बदबूदार और गंदे पानी ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि ग्रामीणों ने सोमवार सुबह ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कर प्रशासन और एसटीपी एसोसिएशन के खिलाफ विरोध जताया। करीब एक महीने से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की मुख्य लाइन में रिसाव होने के कारण गंदा पानी मुख्य मार्ग सहित आसपास के खेतों व घरों के पास फैल गया है। वहीं लगातार फैल रही दुर्गंध से ग्रामीणों का जीवन कठिन हो गया है।

यह मामला जयपुर नगर निगम के वार्ड-59 के अंतर्गत आने वाले रातल्या गांव का है, जहां करीब दो वर्ष पूर्व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया था। तब भी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था और प्लांट को आबादी से दूर लगाने की मांग उठाई थी, लेकिन जेडीए और एसटीपी एसोसिएशन के आगे ग्रामीणों को मजबूर होकर झुकना पड़ा।
लीकेज से बनी दुर्गंध, जलभराव और बीमारी का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक माह से एसटीपी लाइन में लीकेज है। कारखानों और प्लांट से निकलने वाला कचरा युक्त पानी एक ही स्थान पर इकट्ठा हो गया है, जिससे भारी मात्रा में दुर्गंध फैल रही है। कई स्थानों पर सड़क पर चलना संभव नहीं रहा।
ग्रामीण कजोड़मल शर्मा और घासीराम राणा ने कहा—
“हम नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं। बदबू से बच्चों का बाहर निकलना बंद हो गया है। मच्छर और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन को कई बार अवगत कराया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
उन्होंने बताया कि रात को खिड़की-दरवाजे बंद रखने पर भी बदबू का असर कम नहीं होता। पशुओं को भी पानी के कारण छाले-संक्रमण जैसी दिक्कतें हो रही हैं।
सोमवार सुबह किया ‘सद्बुद्धि यज्ञ’
समस्या के समाधान न होने पर ग्रामीणों ने सोमवार तड़के एसटीपी एसोसिएशन, जेडीए और सरकार के खिलाफ ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया।
यज्ञ में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा—
👉 “दो दिन में पाइप लाइन रिपेयर और पानी की निकासी व्यवस्था करें,
👉 बदबू-मुक्ती के उपाय किए जाएं,
👉 और स्थायी समाधान प्रस्तुत करें।”
हल नहीं हुआ तो हाईकोर्ट में याचिका
ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि यदि 48 घंटे में समस्या का समाधान नहीं किया गया तो राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि पर्यावरण और मानवाधिकार का मुद्दा है।
उन्होंने मांग की कि—
✔ पाइप लाइन तत्काल बदली जाए,
✔ लीकेज स्थल को सील कर पक्का उपचार किया जाए,
✔ बदबूणाशक छिड़काव हो,
✔ और प्लांट की नियमित मॉनिटरिंग टीम नियुक्त की जाए।
अभी हालात जस के तस
एसोसिएशन को कई बार शिकायत देने के बावजूद न तो मरम्मत की कार्रवाई हुई और न ही वैकल्पिक जल निकासी की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों के अनुसार, यदि सरकार समय पर आगे नहीं आई तो आने वाले दिनों में जनआंदोलन तेज होगा।
रातल्या के निवासियों का कहना है कि—
“हमने अपना स्वास्थ्य, बच्चों का भविष्य और गांव की शांति दांव पर लगा दी। अब धैर्य की सीमा समाप्त हो रही है।”
अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो कानूनी संघर्ष शुरू होने की संभावना तय है।

