एसकेआईटी में सुरक्षित सड़क मार्ग अभियान के अंतर्गत हेलमेट वितरण, मातृशक्ति को किया गया सम्मानित
By : लोकेंद्र सिंह शेखावत
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 05,2025
जयपुर। सुरक्षित सड़क मार्ग अभियान के अंतर्गत सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एसकेआईटी एम एंड जी, जयपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग की ओर से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), राजस्थान के तत्वावधान में तथा “सुषमा अभियान” से प्रेरित था। इस अवसर पर आईएसआई प्रमाणित हेलमेट महिला कर्मचारियों एवं छात्राओं (मातृशक्ति) को वितरित किए गए और उन्हें सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री टी.सी. गुप्ता (मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग) ने अपने संबोधन में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े तथ्यात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए हेलमेट उपयोग की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सड़क पर सजगता, यातायात नियमों का पालन और सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग ही दुर्घटनाओं से बचाव के सर्वोत्तम उपाय हैं।
विशिष्ट अतिथि जसवंत लाल खत्री (मुख्य अभियंता, गुणवत्ता नियंत्रण, पीडब्ल्यूडी) ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न सुरक्षा अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग न केवल अधोसंरचना निर्माण पर बल्कि नागरिकों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी कार्य कर रहा है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा— “अपने सपनों को ऊँचाई दें, लेकिन पाँव ज़मीन पर रखें।”
सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. डी.के. शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए विभाग की योजनाओं, नवाचारों और सड़क सुरक्षा संबंधी पहलों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर एसकेआईटी एम एंड जी के डीन डॉ. आर.के. जैन ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
इस अवसर पर पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अभियंता, एसकेआईटी के प्राध्यापक, तकनीकी कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों में सड़क सुरक्षा के प्रति व्यवहारिक समझ और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।