योगेश शर्मा
जयपुर। जगतपुरा स्थित स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एंड ग्रामोथान (एसकेआईटी) में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा सी-डैक (C-DAC) नोएडा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय ‘व्यावहारिक साइबर सुरक्षा जागरूकता एवं साइबर अपराध: तकनीकी संस्थानों को धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी एवं डिजिटल खतरों से सुरक्षित बनाना’ रहा।
भारत सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम
यह महत्वपूर्ण कार्यशाला सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता परियोजना (ISEA) फेज-III के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित थी। इसमें राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के महाविद्यालयों के फैकल्टी सदस्यों, शोधार्थियों, तकनीकी सहायकों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
डिजिटल युग में सुरक्षा अनिवार्य: डॉ. मेहुल महर्षि
कार्यक्रम की शुरुआत कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मेहुल महर्षि के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा:
”आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति और संस्थान की अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार ही डिजिटल खतरों से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।”
लाइव डेमो से समझाए साइबर खतरे
सी-डैक नोएडा के साइबर सुरक्षा अभियंता शुभम त्रिपाठी ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने निम्नलिखित विषयों पर व्यावहारिक जानकारी साझा की:
- एथिकल हैकिंग और फिशिंग: लाइव प्रदर्शन के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे फर्जी वेबसाइटें (Phishing sites) लोगों का डेटा चुराती हैं।
- डार्क वेब और ओसिंट (OSINT): डार्क वेब मॉनिटरिंग और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के जरिए अपराधों की जांच कैसे की जाती है।
- डिजिटल फ्रॉड डिटेक्शन: ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान होने वाली ठगी को समय रहते पहचानने के तरीके।
प्रश्नोत्तर सत्र और सम्मान
कार्यशाला के दौरान एक संवाद सत्र भी रखा गया, जिसमें प्रतिभागियों ने साइबर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और मोबाइल सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. पंकज दधीच ने शुभम त्रिपाठी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन सूचना प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन जैन ने दिया।
समन्वय
इस सफल आयोजन का प्रबंधन प्रो. डॉ. पंकज दधीच और कंप्यूटर साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर विकाश धनखड़ द्वारा किया गया। संस्थान के अनुसार, ऐसी कार्यशालाएं भविष्य में तकनीकी संस्थानों को सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में मदद करेंगी।
मुख्य बिंदु:
- फोकस: ऑनलाइन ठगी, फिशिंग अटैक और डिजिटल सुरक्षा।
- आयोजक: कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, एसकेआईटी।
- सहयोग: सी-डैक नोएडा एवं आईटी मंत्रालय (भारत सरकार)।