एसकेआईटी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘एएनसीटी-2025’ का भव्य आयोजन — नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर हुई गहन चर्चा
Edited By: लोकेंद्र सिंह शेखावत
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 16, 2025
जयपुर। स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एंड ग्रामोत्थान (एसकेआईटी), जयपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “एडवांसमेंट इन नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी 2025 (ANCT-2025)” का हाइब्रिड माध्यम में आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया और तकनीक के क्षेत्र में हो रहे अद्भुत विकास पर गहन विमर्श किया।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत संस्थान के अकादमिक निदेशक प्रो. एस. एल. सुराणा के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने नैनोटेक्नोलॉजी और वायरलेस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए इसे “आगामी औद्योगिक क्रांति की नींव” बताया।
सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार जैन ने सम्मेलन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह ANCT श्रृंखला की पांचवीं कड़ी है, जिसमें कुल 90 से अधिक शोध पत्रों में से 35 श्रेष्ठ पत्रों का चयन किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत, इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के माध्यम से वैश्विक मंच पर सेमीकंडक्टर निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है।
मुख्य अतिथि प्रो. प्रीतम कुमार, प्रोफेसर, आईआईटी पटना ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नवीनतम तकनीकों को समझने का एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हर पाँच वर्षों में डाटा रेट दस गुना बढ़ रहा है और अब तकनीक का मूल्यांकन केवल उसके आकार से नहीं, बल्कि उसकी स्मार्टनेस से किया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. देबव्रत सिकदर, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी गुवाहाटी ने कहा कि हम ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ टेक्नोलॉजी के युग में जी रहे हैं, जहाँ नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स की मदद से डिवाइसेज़ और भी छोटे, तेज़ एवं ऊर्जा कुशल होते जा रहे हैं। उन्होंने 5जी, 6जी और उससे आगे की तकनीकों की भूमिका तथा इंटरडिसिप्लिनरी कोलैबोरेशन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
स्पेन की यूनिवर्सिटी रेमन ल्युल, बार्सिलोना से आए डॉ. जाउमे एंगुएरा ने इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के सहयोग की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का उद्धरण देते हुए प्रतिभागियों को प्रेरित किया:
“जीवन की कठिनाइयाँ आपको नष्ट करने के लिए नहीं होतीं, बल्कि यह जताने के लिए होती हैं कि आपके भीतर उन्हें सामना करने की अद्भुत क्षमता है।”
सम्मेलन संयोजक डॉ. पल्लव रावल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सक्रिय सहयोग और सहभागिता से यह सम्मेलन अत्यंत सफल रहा।
आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. मुकेश अरोड़ा और प्रो. प्रवीण कुमार जैन रहे, जबकि संयोजक के रूप में डॉ. मोनिका माथुर और डॉ. पल्लव रावल ने दायित्व संभाला। समन्वयकों में डॉ. शुभी जैन, हर्षल निगम, राहुल पांडे और मिस ग्लोरिआ जोसेफ शामिल रहे।

