एसकेआईटी के रसायन शास्त्र विभाग में पांच दिवसीय नेशनल वर्कशॉप ‘ग्रीन प्रैक्टिस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का सफल समापन
| लोकेंद्र सिंह शेखावत
जयपुर। स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एंड ग्रामोत्थान (एसकेआईटी), रामनगरिया, जगतपुरा के रसायन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नेशनल वर्कशॉप ‘ग्रीन प्रैक्टिस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य सतत विकास के लिए पर्यावरण-अनुकूल वैज्ञानिक प्रक्रियाओं, ग्रीन केमिस्ट्री और प्रदूषण नियंत्रण के आधुनिक दृष्टिकोणों पर व्यापक चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. निवेदिता कॉल, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण प्रदूषण से होने वाले दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने औद्योगिक, शहरी और घरेलू प्रदूषण के वैज्ञानिक समाधान बताते हुए सतत विकास के लिए ग्रीन प्रैक्टिस को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के दूसरे दिन डॉ. मीना, असिस्टेंट प्रोफेसर, एमएनआईटी जयपुर ने जल प्रदूषण, उसके पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव तथा जल शुद्धिकरण और नियंत्रण की प्रभावी वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
तीसरे दिन प्रतिभागियों ने एमएनआईटी जयपुर स्थित मैटेरियल रिसर्च लैबोरेट्री का शैक्षणिक भ्रमण किया, जहाँ उन्हें अत्याधुनिक अनुसंधान उपकरणों, परीक्षण तकनीकों और प्रयोगात्मक प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हुई। इस भ्रमण को प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी बताया।
चौथे दिन डॉ. सुशील कुमार शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोटा ने धातुओं में होने वाली क्षरण (करोशन) की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने ग्रीन इनहिबिटर्स के माध्यम से क्षरण रोकने के पर्यावरण-अनुकूल और किफायती उपायों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया।
कार्यशाला के अंतिम दिन डॉ. गरिमा कौशिक, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान ने खाद्य एवं पेय पदार्थों में पाए जाने वाले कंटेमिनेशन, उनकी पहचान की आधुनिक विधियों तथा रोकथाम के उपायों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, जिसे प्रतिभागियों ने विशेष रुचि के साथ सुना।
कार्यशाला की कन्वीनर प्रो. डॉ. विनीता शर्मा ने बताया कि इस नेशनल वर्कशॉप में देशभर के विभिन्न शिक्षण एवं शोध संस्थानों से आए शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को ग्रीन केमिस्ट्री और सतत विकास से जुड़े नवीन शोध व व्यावहारिक अनुप्रयोगों की गहन समझ मिली।
समापन सत्र में रसायन शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति जोशी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूनम ओझा द्वारा किया गया।
यह नेशनल वर्कशॉप न केवल अकादमिक दृष्टि से उपयोगी सिद्ध हुई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।