एसकेआईटी और एचजीआईईएल के बीच सेतु डिजाइन पर संयुक्त प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर हुआ

एसकेआईटी और एचजीआईईएल के बीच सेतु डिजाइन पर संयुक्त प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर हुआ समझौता
उद्योग और शिक्षा का संगम, छात्रों को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

Edited By : लोकेंद्र सिंह शेखावत 
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 12,2025

जयपुर।
स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एसकेआईटी), जयपुर और एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड (एचजीआईईएल) के बीच एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक-औद्योगिक सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सिविल अभियांत्रिकी के छात्रों के लिए सेतु (ब्रिज) डिजाइन विषय पर एक संयुक्त प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करना है।

यह पाठ्यक्रम छात्रों को ब्रिज डिजाइन की आधुनिक और व्यावहारिक समझ प्रदान करेगा, जिसमें वास्तविक परियोजनाओं का विश्लेषण, इंडस्ट्री कोड ऑफ प्रैक्टिस, नवीनतम तकनीकी विधियाँ, और डिज़ाइन सॉफ्टवेयर का उपयोग शामिल रहेगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस तरह से तैयार की गई है कि छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावसायिक दक्षता भी प्राप्त हो।

मुख्य विशेषताएं:

  • कक्षा शिक्षण एवं तकनीकी कार्यशालाएं
  • ऑन-साइट विज़िट्स (वास्तविक निर्माण स्थलों का भ्रमण)
  • इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के विशेष व्याख्यान
  • प्री-प्लेसमेंट टेस्ट और मूल्यांकन सत्र
  • जॉब ओरिएंटेड लर्निंग मॉड्यूल

एसकेआईटी के निदेशक डॉ. जयपाल मील ने कहा, “यह साझेदारी विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक कौशल प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम बनेगी, जिससे उन्हें भविष्य में बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे।”
वहीं, एचजीआईईएल की ओर से मुख्य मानव संसाधन अधिकारी रचना मोहन ने कहा कि “इंजीनियरिंग छात्रों को इंडस्ट्री की ज़मीनी जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह पाठ्यक्रम इसी दिशा में एक ठोस प्रयास है।”

इस मौके पर एसकेआईटी के डायरेक्टर (अकादमिक) प्रो. एस.एल. सुराना, डीन प्रो. आर.के. जैन, सिविल विभागाध्यक्ष डॉ. डी.के. शर्मा, तथा एचजीआईईएल के एचआर विभाग से मंजुल माथुर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यह एमओयू न केवल छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है, बल्कि यह शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच तालमेल का एक अनुकरणीय उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। माना जा रहा है कि इस पहल से इंजीनियरिंग शिक्षा को नई दिशा मिलेगी और व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा।


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