एसएमएस अस्पताल हादसे ने झकझोरा देश को — प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, विपक्ष और केंद्रीय मंत्रियों तक ने जताया दुख, उठी निष्पक्ष जांच की मांग
रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर, संपादन नरेश गुनानी, टेलीग्राफ टाइम्स।
जयपुर, 6 अक्टूबर 2025
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (एसएमएस) के ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड में रविवार देर रात लगी आग में आठ मरीजों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे देश में शोक की लहर फैल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की और जांच की मांग उठाई।

प्रधानमंत्री मोदी बोले — “अत्यंत दुखद त्रासदी”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि जयपुर, राजस्थान के अस्पताल में आग की त्रासदी के कारण लोगों की जान जाना अत्यंत दुखद है। “जिन्होंने अपने प्रियजन खोए हैं, उन्हें मेरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा: “हर संभव राहत, पारदर्शी जांच होगी”
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार देर रात ही अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने कहा कि सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों और अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेकर त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मरीजों की सुरक्षा और इलाज के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।”
उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवारों को शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत: “भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, उच्च स्तरीय जांच जरूरी”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के ICU में आग लगने से सात लोगों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि “राज्य सरकार को इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।”
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी: “हृदय विदारक घटना”
राज्य की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि “जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में आग लगने की हृदय विदारक घटना में मरीजों की जनहानि का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को शक्ति प्रदान करें।”
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली: “भीषण घटना ने मन को झकझोर दिया”
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि “इस भीषण घटना ने मन को झकझोर कर रख दिया है। तीन महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत अत्यंत दुःखद है।” उन्होंने कहा कि “ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें और परिजनों को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा: “सरकार नाम की चीज नहीं”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “प्रदेश में सरकार नाम की चीज नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री अब तक सो रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि “मृतकों के परिवारों को राहत और जवाबदेही के बजाय भाजपा नेता केवल बयानबाजी में लगे हैं। पुलिस पीड़ित परिजनों को दूर धकेल रही है।”
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर: “लापरवाही पर कठोर कार्रवाई होगी”
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुःखद और व्यथित करने वाली है।
उन्होंने बताया कि “घटना की जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
खींवसर ने कहा कि “राज्य सरकार की पूरी टीम सतर्क है, मुख्यमंत्री लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।”
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म: “घटना की जांच की जा रही”
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि “मुख्यमंत्री के साथ अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया गया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और मरीजों को हर संभव सहायता दी जा रही है।”
सांसद हनुमान बेनीवाल: “यह स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का प्रमाण”
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि “राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल में आगजनी की दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। यह केवल मानवीय त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का प्रमाण है।”
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत: “हाईकोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच जरूरी”
जोधपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। सरकार को चाहिए कि इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। हाईकोर्ट के सीटिंग या रिटायर्ड जज की मॉनिटरिंग में न्यायिक जांच आयोग बने।”
उन्होंने कहा कि “दिवंगतों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और गंभीर रूप से झुलसे मरीजों का इलाज दिल्ली एम्स में करवाने तक की व्यवस्था की जाए।”