एआई से पहचान: राजस्थान में डमी कैंडिडेट और अपराधियों की अब खैर नहीं

एआई से पहचान: राजस्थान में डमी कैंडिडेट और अपराधियों की अब खैर नहीं

| गौरव कोचर

जयपुर, 22 फरवरी। राजस्थान अब केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सुशासन स्थापित करने में भी देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का ऐसा जाल बुना है कि अब डमी कैंडिडेट से लेकर आदतन अपराधियों तक की पहचान करना महज कुछ सेकंड्स का काम रह गया है। जहाँ अन्य राज्य अभी एआई चैटबॉट्स पर काम कर रहे हैं, वहीं राजस्थान ने ‘कंप्यूटर विजन-आधारित एआई एप्लिकेशन’ को धरातल पर उतार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

​सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का ‘फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम’

​सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने बताया कि विभाग के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर ने कंप्यूटर विजन पर आधारित एआई समाधानों की एक पूरी श्रृंखला विकसित की है। यह प्रणाली सार्वजनिक सेवा प्रदायगी, कानून प्रवर्तन और नागरिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है।

​इन तीन क्षेत्रों में एआई कर रहा है कमाल

​1. परीक्षा शुचिता: डमी अभ्यर्थियों पर नकेल

​प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए विभाग ने एआई-संचालित फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम तैयार किया है।

  • विशाल डेटाबेस: यह सिस्टम संदिग्ध अभ्यर्थियों के फोटो का 50 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड से मिलान करता है।
  • सटीक पहचान: उच्च-सटीकता वाली इस तकनीक से डमी कैंडिडेट को तुरंत पकड़ा जा सकता है, जिससे भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ी है।

​2. अपराध नियंत्रण: आदतन अपराधियों की ‘कुंडली’ उजागर

​कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक विशेष एआई सिस्टम डिप्लॉय किया गया है जो अपराधियों की पहचान को आसान बनाता है।

  • अपराधिक रिकॉर्ड मिलान: इसके जरिए किसी भी अभियुक्त की छवि का 10 लाख फोटो युक्त आपराधिक डेटाबेस से मिलान संभव है।
  • त्वरित जांच: इससे आदतन अपराधियों की निगरानी और पैटर्न की पहचान करने में पुलिस को बड़ी सहायता मिल रही है।

​3. मानवीय पहल: लावारिस शवों की पहचान

​तकनीक का संवेदनशील उपयोग करते हुए विभाग ने अज्ञात शवों की पहचान हेतु भी एआई का उपयोग शुरू किया है।

  • गुमशुदा डेटाबेस: अज्ञात शवों के फोटो का गुमशुदा व्यक्तियों के डेटाबेस से मिलान किया जाता है।
  • सामाजिक प्रभाव: यह पहल परिवारों को उनके बिछड़े हुए परिजनों से मिलाने या अंतिम संस्कार हेतु अपनों तक पहुँचाने में मदद करती है।

​सुरक्षित और नैतिक एआई का उपयोग

​विभाग द्वारा विकसित ये सभी एआई एप्लिकेशन राजस्थान स्टेट डेटा सेंटर के ‘एयर-गैप्ड’ (पूरी तरह सुरक्षित और बाहरी नेटवर्क से अलग) वातावरण में संचालित हैं। इसमें डेटा संरक्षण, गोपनीयता और नैतिक एआई उपयोग के सभी कड़े मानकों का पालन किया जा रहा है।

​”राजस्थान सरकार का यह नवाचार न केवल प्रशासन को आधुनिक बना रहा है, बल्कि सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल समाधानों के जरिए आम नागरिक का भरोसा भी जीत रहा है।”

 

​मुख्य बिंदु:

  • सॉफ्टवेयर: पूरी तरह स्वदेशी और विभाग द्वारा विकसित।
  • सुरक्षा: अत्याधुनिक ऑडिट लॉगिंग और ट्रेसबिलिटी सिस्टम।
  • प्रतिबद्धता: निष्पक्ष चयन और अपराध मुक्त राजस्थान।

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