ऊर्जा क्षेत्र में व्यावहारिक सुधार बेहद आवश्यक: आरतिया (ARTIA)

राजस्थान में 60 हजार मेगावाट क्षमता के बाद भी पावर कट; ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन घाटा 12 से 15 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान

रिपोर्ट योगेश शर्मा | जयपुर

जयपुर (विशेष संवाददाता)। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया – ARTIA) ने राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र (Power Sector) की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इसमें तत्काल ‘व्यावहारिक सुधारों’ (Real & Practical Reforms) की आवश्यकता पर जोर दिया है।

​आरतिया के प्रमुख पदाधिकारियों—विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, प्रेम बियाणी, सुनील बंसल, कैलाश शर्मा, मधुसूदन शर्मा, पंकज गोयल, राजकुमार शर्मा, श्रवण पारीक, तरूण शारदा, दिनेश गुप्ता तथा इंडियन विंड पावर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र व्यास एवं महामंत्री गिरीश अग्रवाल ने संयुक्त बयान में कहा कि राज्य में बिजली का उत्पादन तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन जर्जर व अप्रभावी ट्रांसमिशन और वितरण (T&D) तंत्र के कारण भारी मात्रा में उत्पादित बिजली व्यर्थ (Loss) हो रही है।

​60 हजार MW क्षमता, फिर भी भीलवाड़ा जैसे औद्योगिक शहर भी पावर कट से परेशान

​टीम आरतिया द्वारा किए गए एक शोध (Research Input) के अनुसार:

  • ​राजस्थान में वर्तमान में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 60,000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
  • ​इसमें से सौर व पवन ऊर्जा (Renewable Energy) की क्षमता ही अकेले करीब 40,000 मेगावाट है।

​इसके बावजूद, राज्य के दैनिक उपयोग से अधिक उत्पादन होने के बाद भी हजारों गांवों, कस्बों और शहरों में लगातार पावर कट की समस्या बनी हुई है। यहाँ तक कि प्रदेश की कपड़ा नगरी भीलवाड़ा जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में उद्यमियों को पावर कट के दौरान जनरेटर (Generators) से महंगी बिजली उत्पन्न करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। आरतिया के अनुसार, यह स्थिति सरकारी बिजली कंपनियों के कमजोर ‘पावर मैनेजमेंट’ को दर्शाती है।

​ट्रांसमिशन-डिस्ट्रीब्यूशन में 12-15 हजार करोड़ का भारी नुकसान

​रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन बड़ी समस्याओं और उनके समाधानों को रेखांकित किया गया है:

  1. सिंगल विंडो क्लीयरेंस: ऊर्जा क्षेत्र में आने वाले निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और त्वरित ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ बने, ताकि उन्हें अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें।
  2. त्रुटिरहित वितरण प्रणाली: बिजली संचरण (Transmission) के दौरान होने वाले क्षय के कारण राजस्थान की बिजली कंपनियों को सालाना अनुमानित 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।
  3. अन्य राज्यों का उदाहरण: गुजरात और ओडिशा जैसे राज्यों ने अपने ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को आधुनिक और व्यवस्थित बनाकर बिजली डिस्कॉम्स को घाटे से बाहर निकाला है।

​आरतिया के प्रमुख सुझाव एवं समाधान

​राज्य को ऊर्जा संकट से उबारने और बिजली कंपनियों को लाभ में लाने के लिए आरतिया ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाने का सुझाव दिया है:

  • केन्द्र सरकार की योजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन: केंद्र सरकार द्वारा ₹5 करोड़ से अधिक लागत वाले ट्रांसमिशन सुधार कार्यक्रमों के तहत राजस्थान में संचरण तंत्र को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
  • ऑटोमेशन प्रणाली (Automation System): संपूर्ण पावर ग्रिड की निगरानी के लिए केंद्र की ₹1.50 लाख करोड़ से अधिक की ऑटोमेशन योजना में राजस्थान अपनी रफ्तार बढ़ाए। इस आधुनिक प्रणाली की खासियत यह है कि इसमें 3 सामान्य फॉल्ट अपने-आप (Self-Healing) ठीक हो जाते हैं और हर फॉल्ट का सटीक इंडिकेशन मिलता है।
  • निदेशक मंडल में उद्योग जगत की भागीदारी: आरतिया ने मांग की है कि राज्य की बिजली कंपनियों के संचालन और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को आवश्यक अधिकारों के साथ शामिल किया जाए। उनके मार्गदर्शन से कंपनियों के संचित घाटे को समाप्त कर उन्हें मुनाफे की ओर ले जाया जा सकता है।

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