योगेश शर्मा
जयपुर। मानसरोवर के किरण पथ स्थित वेदना निवारण केन्द्र में आयोजित पांच दिवसीय ‘स्वास्थ्य संवर्धन शिविर’ के दूसरे दिन साधकों को प्राकृतिक चिकित्सा और प्राचीन भारतीय पद्धतियों के वैज्ञानिक महत्व से रूबरू कराया गया। मंगलवार को आयोजित सत्र में योग, प्राणायाम और यज्ञोपैथी के समन्वय से असाध्य रोगों के निवारण पर विशेष जोर दिया गया।
शिविर के दूसरे दिन की शुरुआत सामूहिक यज्ञ के साथ हुई, जिसमें विशेष वनौषधि युक्त हवन सामग्री का उपयोग किया गया। इसके पश्चात साधकों ने ग्रीन जूस का सेवन किया और यज्ञ के औषधीय धूम्र के बीच योगासन व प्राणायाम का अभ्यास किया।
यज्ञोपैथी: घर के लिए एक प्राकृतिक रक्षा कवच
यज्ञोपैथी विशेषज्ञ सुशील कुमार शर्मा ने यज्ञ के वैज्ञानिक पक्ष को स्पष्ट करते हुए बताया कि आम की समिधा और देसी गाय के घी से किया गया हवन न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि प्राणायाम के साथ मिलकर शरीर को विशेष लाभ पहुँचाता है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- यज्ञ से वातावरण में हानिकारक बैक्टीरिया कम होते हैं और रेडिएशन का प्रभाव घटता है।
- यज्ञीय धूम्र से ‘नेगेटिव आयन’ बढ़ते हैं, जो मानसिक शांति और सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं।
- इसे दैनिक जीवन में शामिल करने से घर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच तैयार होता है।
उपवास और ऑटोफैगी: शरीर की आंतरिक सफाई
शिविर में पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ‘उपवास’ के चिकित्सा विज्ञान पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उपवास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीर्ण रोगों की अचूक चिकित्सा है।
- ऑटोफैगी प्रक्रिया: उपवास के दौरान शरीर में ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy) प्रक्रिया सक्रिय होती है, जिसमें शरीर अपनी ही क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट कर नई कोशिकाओं के निर्माण में ऊर्जा लगाता है।
- विशेषज्ञों ने सलाह दी कि स्वस्थ रहने और पुराने रोगों से मुक्ति के लिए सप्ताह में कम से कम एक दिन उपवास अवश्य रखना चाहिए।
संतुलित दिनचर्या और प्राकृतिक आहार
शिविर में प्रतिभागियों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें फलाहार, सलाद और संतुलित आहार पर रखा जा रहा है। गायत्री परिवार राजस्थान जोन के समन्वयक ओमप्रकाश अग्रवाल और प्रान्तीय ट्रस्टी सतीश भाटी के मार्गदर्शन में चल रहे इस शिविर का उद्देश्य लोगों को दवाओं के बजाय जीवनशैली में बदलाव कर निरोगी बनाना है।
इस पांच दिवसीय आयोजन में जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधक प्राकृतिक चिकित्सा, योग और प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने की कला सीख रहे हैं। शिविर का समापन आगामी दिनों में विभिन्न स्वास्थ्य सत्रों के साथ होगा।