नरेश गुनानी
उदयपुर, 4 मई 2026 प्रदेश की जल सुरक्षा और कृषि सिंचाई को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने सोमवार को उदयपुर सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों के साथ संभाग स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उदयपुर संभाग की बड़ी जल परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति, आ रही बाधाओं और भविष्य की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
सरकार का संकल्प: हर खेत को पानी, हर घर को पेयजल
समीक्षा के दौरान सुरेश रावत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पेयजल और हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जल प्रबंधन एक संवेदनशील विषय है, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख परियोजनाओं पर मंथन और निर्देश
बैठक में संभाग की जीवनदायिनी मानी जाने वाली योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई:
- जाखम-जयसमंद-बड़गांव-मातृकुंडिया परियोजना: मंत्री ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए सभी तकनीकी और प्रशासनिक पूर्व तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं, ताकि मंजूरी मिलते ही काम तेजी से शुरू हो सके।
- देवास तृतीय एवं चतुर्थ चरण: उदयपुर की झीलों और पेयजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण इस परियोजना के कार्यों की गति पर चर्चा हुई। वन क्षेत्र से जुड़ी एनओसी और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों पर मंत्री ने अधिकारियों को समन्वय स्थापित कर समाधान निकालने के निर्देश दिए ताकि निर्माण कार्य में देरी न हो।
- राजसमंद की सिंचाई योजनाएं: राजसमंद जिले के लिए बगोलिया फीडर और खरीफ फीडर सहित अन्य बजट घोषणाओं के कार्यों की प्रगति जांची गई। रावत ने निर्देश दिए कि बजट घोषणा के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तय समय-सीमा में पूर्ण किया जाए।
कार्यप्रणाली को लेकर कड़े निर्देश
सुरेश रावत ने बैठक में मौजूद अभियंताओं और अधिकारियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:
- गुणवत्ता से समझौता नहीं: निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री और तकनीक उच्च स्तरीय होनी चाहिए।
- डेडलाइन का पालन: सभी परियोजनाएं अपने निर्धारित समय पर पूरी हों ताकि लागत में वृद्धि न हो और जनता को समय पर लाभ मिले।
- समन्वय: अंतर-विभागीय मुद्दों (जैसे वन विभाग या भूमि अवाप्ति) को उच्च स्तर पर संवाद कर तुरंत सुलझाया जाए।