उदयपुर में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का टीबी नियंत्रण, नशामुक्ति और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर

उदयपुर/ 8 अगस्त / सुनील शर्मा/राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को उदयपुर में जिला स्तरीय अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में जिले में टीबी नियंत्रण, नशामुक्ति अभियान और स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधारने समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और आम जनता के बीच व्यापक जागरूकता फैलाने के कड़े निर्देश दिए।

टीबी नियंत्रण: खनन और सीमेंट फैक्ट्री क्षेत्रों पर विशेष नजर

​टीबी उन्मूलन को लेकर राज्यपाल ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

  • सर्वे की आवश्यकता: खनन क्षेत्रों, सीमेंट फैक्ट्रियों और इनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों का प्राथमिकता से सर्वे कराया जाए।
  • कच्ची बस्तियों पर ध्यान: शहर की कच्ची बस्तियों में भी घर-घर सर्वे चलाकर संभावित मरीजों की समय रहते पहचान की जाए ताकि उन्हें तुरंत सही इलाज उपलब्ध कराया जा सके।

नशामुक्ति अभियान: “नशा आग है, जिसकी आंच अपने घर तक भी पहुंच सकती है”

​नशे के खिलाफ लड़ाई को एक जन-आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नशा एक ऐसी आग है, जिसकी आंच किसी के भी घर तक पहुंच सकती है। इसी बात को ध्यान में रखकर युवाओं और उनके परिवारों को सामाजिक और आर्थिक नुकसान के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

  • ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यक्रम: गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने के लिए पंचायत स्तर पर नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
  • पुनर्वासित लोगों का सम्मान: जिन लोगों ने नशा छोड़ दिया है, उनका सामाजिक मंचों पर सम्मान किया जाए और उनसे निरंतर संपर्क बनाए रखा जाए ताकि वे दोबारा इस आदत की ओर न लौटें।
  • सरकारी कार्यालय बनें नशामुक्त आदर्श केंद्र: राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सभी राजकीय कार्यालयों में नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए। कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नशा न करे, जिससे सरकारी दफ्तर समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकें।

स्कूली शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने पर बल

​जिले में स्कूली शिक्षा की स्थिति की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर दिया।

“यदि प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत होगी, तो बड़ी कक्षाओं और कॉलेज स्तर पर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण विद्यार्थी तैयार होंगे।”

 

  • बुनियादी समझ का विकास: प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सीखने की क्षमता और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास किए जाएं।
  • सफल छात्रों का रिकॉर्ड और प्रेरणा: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का रिकॉर्ड संधारित किया जाए। उनकी सफलता की कहानियों को अन्य विद्यार्थियों के साथ साझा किया जाए ताकि वे भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकें।

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