उदयपुर/नरेश गुनानी/उदयपुर जिले के झाड़ोल स्थित ग्राम बीड़ा में आयोजित ग्राम विकास चौपाल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब, युवा, किसान और महिला—इन चारों प्रमुख वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इन सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्राप्त सुझावों को राज्य के बजट में भी प्राथमिकता से शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘ग्राम विकास चौपाल’ जैसे आयोजनों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को एक नई दिशा मिल रही है।
महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र व राज्य सरकार के बड़े कदम
चौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में चलाई जा रही योजनाओं और पहलों का उल्लेख किया:
- ऐतिहासिक पहल: महिला प्रतिनिधित्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसी ऐतिहासिक पहल की गई है।
- बुनियादी सुविधाएं व शिक्षा: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान, घर-घर शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस और ‘हर घर नल से जल’ जैसे कदमों से महिलाओं का जीवन सुगम हुआ है। बालिकाओं को शिक्षा के लिए साइकिल, स्कूटी एवं यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जा रही है।
- आर्थिक व सामाजिक सहायता:
- मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना: इसके तहत पशुपालक महिलाओं को 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है।
- मां वाउचर योजना: गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए ‘मां वाउचर योजना’ का लाभ मिल रहा है।
- पेंशन: बुजुर्ग माताओं को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है।
- राजीविका की भूमिका: राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के माध्यम से महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ स्वागत
चौपाल में मुख्यमंत्री के आगमन पर स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक वालर नृत्य और बच्चों ने गैर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने कलाकारों और बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की।
’लखपति दीदियों’ ने साझा की सफलता की कहानियां
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राजीविका से जुड़ी महिलाओं से सीधा संवाद किया, जहाँ महिलाओं ने अपनी आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं:
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- गायत्री सुथार (मास्टर ट्रेनर व लखपति दीदी): “सीआरपी टीम की मदद से एसएचजी से जुड़ने और प्रशिक्षण लेने के बाद मैंने काम शुरू किया। आज मेरे गांव में 35 स्वयं सहायता समूह हैं। मैंने दिव्यांग सखी, बीसी सखी और डेटा एंट्री सखी के रूप में कार्य किया। आज मैं एक मास्टर ट्रेनर और ‘लखपति दीदी’ हूँ।”
- मीरा देवी (पशु सखी): “वर्ष 2014 में समूह से जुड़ी, जहाँ से 40 हजार रुपये का ऋण लेकर बकरी पालन शुरू किया। इससे मुझे सालाना 1.20 लाख रुपये की आमदनी हुई। अब मैं गांव के 16 समूहों को संभालती हूँ और हर महीने 17 से 18 हजार रुपये कमा रही हूँ।”
- रेखा मेघवाल (वंदन मैनेजर): “समूह से जुड़कर क्लस्टर मैनेजर और वंदन मैनेजर के रूप में काम किया, जिससे मासिक आय 15 हजार रुपये हुई। सिलाई का काम शुरू करने और राज्य सरकार से मिले टैबलेट के ज़रिए काम को आगे बढ़ाया। आज मेरी वार्षिक आय 3 लाख रुपये है।”
- भानु कुमारी (बैंक सखी): “आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर समूह से जुड़ी और बैंक सखी के रूप में कार्य किया। समूह से ऋण लेकर अपनी आय बढ़ाई, जिससे अब 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। साथ ही पीएम आवास योजना का भी लाभ मिला है।”
कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक प्रताप लाल भील, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे।