उत्तरी भारत और पाकिस्तान में बाढ़ का कहर, संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता

उत्तरी भारत और पाकिस्तान में बाढ़ का कहर, संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 06 सितम्बर। गौरव कोचर, टेलीग्राफ टाइम्स।
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश भारत और पाकिस्तान में हाल ही में आई भयावह बाढ़ की स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि महासचिव ने हाल ही में भारत में बाढ़ से हुई भारी तबाही पर गहरा दुख व्यक्त किया था।

भारत में स्थिति गंभीर

उत्तरी भारत के कई राज्य—पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश—पिछले कुछ हफ़्तों से मूसलाधार बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हैं।

  • पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य बताया जा रहा है, जहाँ लगभग 1,900 गाँव बाढ़ की चपेट में हैं।
  • अब तक 3.80 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
  • लाखों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है और फ़सलों के साथ-साथ मवेशियों का भी भारी नुक़सान हुआ है।

यूएन प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार राहत और पुनर्वास कार्यों की अगुवाई कर रही है और जरूरत पड़ने पर संयुक्त राष्ट्र हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।

पाकिस्तान में तबाही

वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान भी इसी समय बाढ़ आपदा से जूझ रहा है। वहाँ उत्तरी इलाक़ों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि पाकिस्तान में मॉनसून के दौरान आई यह त्रासदी जलवायु परिवर्तन की वजह से और भी भीषण हो गई है।

वैश्विक स्तर पर चिंता

यूएन एजेंसियों के आँकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में बाढ़ और अचानक आने वाली बाढ़ (फ़्लैश फ्लड्स) से हर साल हज़ारों लोग अपनी जान गंवाते हैं और अरबों डॉलर का आर्थिक नुक़सान होता है।

महासचिव का संदेश

एंतोनियो गुटेरेश ने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी आपदाएँ अब बार-बार और अधिक घातक रूप में सामने आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

यह आपदा एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खतरों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को उजागर करती है।

 

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