उच्चभिठ्ठी में भागवत कथा की धूम: श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह के प्रसंग पर झूमे श्रद्धालु, भक्ति रस में डूबा क्षेत्र

गणपत चौहान 

पंडित विशालकृष्ण त्रिवेदी के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही ज्ञान गंगा; 17 अप्रैल को विशाल भंडारे के साथ होगा समापन

छाल/उच्चभिठ्ठी। जिले के ग्राम उच्चभिठ्ठी (बीच बस्ती) में आयोजित भव्य श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह अपने चरमोत्कर्ष पर है। भक्ति और श्रद्धा के इस महाकुंभ में प्रतिदिन क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। कथा के सातवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी रासलीला और श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह के पावन प्रसंग ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।

श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह: जीव और ब्रह्म का मिलन

​परसदा निवासी सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित विशालकृष्ण त्रिवेदी जी ने रुक्मणी विवाह के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक विवाह प्रसंग नहीं, बल्कि जीव का ब्रह्म से मिलन का प्रतीक है।

  • भव्य झांकी: कथा के दौरान श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह की जीवंत झांकी सजाई गई। जैसे ही भगवान का विवाह संपन्न हुआ, पूरा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और जयकारों से गूंज उठा।
  • भक्तिमय नृत्य: भजनों की धुनों पर श्रद्धालु स्वयं को रोक नहीं पाए और झूमते-नाचते हुए खुशियां मनाईं। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर वातावरण को पूरी तरह उत्सवमयी बना दिया।

दिव्य अनुष्ठान और मार्गदर्शन

​इस ज्ञान यज्ञ का संपादन यज्ञाचार्य पं. किशन त्रिवेदी जी (परसदा) के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से शुरू होने वाली इस कथा में यजमान परिवार सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रभु भक्ति का रसास्वादन कर रहे हैं।

आज होगा सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष

​आयोजन के अंतिम चरण में आज कथा व्यास द्वारा सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा। कृष्ण-सुदामा की निस्वार्थ मित्रता के प्रसंग के साथ ही राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई जाएगी, जिसके साथ ही भागवत कथा को विश्राम दिया जाएगा।

समापन कार्यक्रम: 17 अप्रैल

​आयोजन समिति ने जानकारी दी कि इस भव्य ज्ञान यज्ञ का औपचारिक समापन 17 अप्रैल को होगा। इस दिन के प्रमुख कार्यक्रम निम्न रहेंगे:

  1. पूर्णाहुति एवं हवन: सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति होगी।
  2. तुलसी वर्षा: श्रद्धालुओं पर आशीर्वाद स्वरूप तुलसी वर्षा की जाएगी।
  3. विशाल भंडारा: दोपहर से प्रभु इच्छा तक महाप्रसाद (भंडारा) का वितरण होगा, जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों के जुटने की संभावना है।

कथा व्यास का संदेश

​पंडित विशालकृष्ण त्रिवेदी ने अपने उद्बोधन में जोर देते हुए कहा, “श्रीमद् भागवत कथा मानव जीवन के संतापों को हरने वाली है। यह हमें प्रेम, समर्पण और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का मार्ग दिखाती है। जो व्यक्ति भागवत के संदेशों को जीवन में उतारता है, उसका कल्याण निश्चित है।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

Block title
Related

विकसित भारत 2047 की परिकल्पना: सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय शिक्षा शिखर सम्मेलन का शुभारंभ

जयपुर।/योगेश शर्मा/सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय (एसजीवीयू), जयपुर में तीन...