ई-कचरे और बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नए नियम लागू, सीपीसीबी ने सख्त निगरानी शुरू की

ई-कचरे और बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नए नियम लागू, सीपीसीबी ने सख्त निगरानी शुरू की

रिपोर्ट: टेलीग्राफ टाइम्स/ नई दिल्ली/ अवधेश बामल 
By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 12,2025

नई दिल्ली, 12 अगस्त। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी) ने देश में ई-कचरे और बैटरी अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन के लिए बड़े कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने नवंबर 2022 में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 अधिसूचित किए, जो 1 अप्रैल 2023 से लागू हैं। ये नियम 106 प्रकार के इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर लागू होते हैं, जिनमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर और यूपीएस सिस्टम जैसे उपकरण शामिल हैं।

इसके अलावा, 24 अगस्त 2022 को बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 भी लागू किए गए, जो सभी प्रकार की बैटरियों—इलेक्ट्रिक वाहन, पोर्टेबल, ऑटोमोटिव और औद्योगिक बैटरियों—को कवर करते हैं। इन नियमों के तहत उत्पादकों और आयातकों को अपशिष्ट बैटरियों के संग्रह, पुनर्चक्रण और नवीनीकरण के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लक्ष्य दिए गए हैं। नियमों में लैंडफिल में बैटरी अपशिष्ट डालने पर प्रतिबंध है।

सीपीसीबी की पहलें
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इन नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई कदम उठाए हैं—

  • ऑनलाइन ई-अपशिष्ट ईपीआर पोर्टल विकसित किया गया है, जिसमें उत्पादकों, निर्माताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और रिफर्बिशरों का पंजीकरण अनिवार्य है।
  • ई-कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं।
  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCB)/प्रदूषण नियंत्रण समितियों (PCC) के लिए कार्ययोजना लागू की गई है, जिसके तहत अनौपचारिक ई-कचरा गतिविधियों की जांच और उन्हें औपचारिक क्षेत्र में लाने पर जोर है।
  • पंजीकृत संस्थाओं से त्रैमासिक और वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट लेना अनिवार्य किया गया है।
  • पर्यावरण क्षतिपूर्ति (EC) दिशानिर्देश बनाए गए हैं, ताकि नियम उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा सके।

ई-कचरे का बढ़ता आंकड़ा
सीपीसीबी के अनुसार देश में ई-कचरा उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

  • 2023-24: 12,54,286.55 टन
  • 2024-25: 13,97,955.59 टन

सख्त निगरानी और निर्देश
सीपीसीबी ने SPCB और PCC को जल एवं वायु प्रदूषण निवारण कानूनों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कई निर्देश जारी किए हैं, जिनमें पंजीकरण सुनिश्चित करना, ईपीआर दायित्व पूरे कराना और ई-कचरा पुनर्चक्रणकर्ताओं द्वारा प्रमाणपत्र जारी करवाना शामिल है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री  कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए कहा कि इन कदमों से देश में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और ई-कचरे का सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल निपटान सुनिश्चित होगा।


 

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