ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पीएम मोदी का UAE दौरा

क्या पेट्रोल-डीजल की महंगाई से मिलेगी राहत?

गौरव कोचर 

​ मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों और आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं। वैश्विक स्तर पर यह माना जा रहा है कि पीएम मोदी का यह दौरा न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकता है।

संकट में समुद्री रास्ते, $105 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल

​ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को संकट में डाल दिया है। दुनिया का एक-तिहाई तेल इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण इस रूट के ‘चोक’ होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को $105 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, ऐसे में यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

मोदी-जायद वार्ता: इन 3 बड़े समझौतों पर टिकी हैं निगाहें

​प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में ‘एनर्जी डिप्लोमेसी’ सबसे ऊपर है:

  • लॉन्ग टर्म ऑयल डील: भारत और UAE के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक बड़े दीर्घकालिक समझौते (Long-term agreement) की संभावना है, जिससे वैश्विक संकट के बावजूद भारत को रियायती और निश्चित दरों पर तेल मिलता रहे।
  • रणनीतिक तेल भंडार (SPR): भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में UAE की हिस्सेदारी बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। इससे भारत के पास आपात स्थिति के लिए सुरक्षित तेल का कोटा बढ़ जाएगा।
  • वैकल्पिक सप्लाई रूट: समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए दोनों देश सुरक्षित परिवहन और रसद (Logistics) के नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

क्या आम जनता को मिलेगी राहत?

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से पेट्रोल-डीजल के दाम रातों-रात कम नहीं होंगे, लेकिन कीमतों में ‘स्थिरता’ जरूर आएगी। यदि भारत और UAE के बीच स्थानीय मुद्रा (Rupee-Dirham) में व्यापार और सीधी तेल आपूर्ति का समझौता मजबूत होता है, तो डॉलर की मजबूती का असर तेल के दामों पर कम पड़ेगा, जिससे भविष्य में कीमतों को घटाने में मदद मिलेगी।

आर्थिक विश्लेषकों की राय

​बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, “2026 में ऊर्जा संकट एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा भारत को सप्लाई चेन के झटकों से बचाने के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है। यदि UAE भारत को विशेष प्राथमिकता देता है, तो हम वैश्विक महंगाई के दौर में भी अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रख पाएंगे।”

मुख्य बिंदु:

  • तारीख: 15 मई 2026
  • प्रमुख मुद्दा: ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण।
  • चुनौती: मध्य पूर्व में युद्ध के कारण चोक पॉइंट का संकट।
  • उम्मीद: तेल की निश्चित और रियायती आपूर्ति।

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