विश्वास योजना-2026 से नियोक्ताओं को मिलेगी राहत, अग्रिम निकासी के नियम हुए बेहद आसान
कोटा/ दिव्या तिवाड़ी/कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अब केवल एक नियामक संस्था के रूप में नहीं, बल्कि नियोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए एक सुविधादाता (Facilitator) के रूप में कार्य कर रहा है। उद्योगों की प्रगति में मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण निवेश है और इसी दिशा में ईपीएफओ प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा हितधारकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार बड़े सुधार कर रहा है।
यह बात अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (राजस्थान अंचल) अजीत कुमार ने दी एसएसआई एसोसिएशन, कोटा द्वारा आयोजित एक विशेष परिचर्चा में उद्यमियों और औद्योगिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही।
अग्रिम निकासी के नियमों में ऐतिहासिक ढील
अजीत कुमार ने नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 की जानकारी देते हुए बताया कि अग्रिम निकासी के नियमों को बेहद सदस्य-हितैषी बनाया गया है:
- बीमारी का इलाज: बीमारी के उपचार के लिए अग्रिम निकासी पर अब कोई सीमा नहीं होगी।
- शिक्षा: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 10 बार तक निकासी की अनुमति होगी।
- विवाह एवं आवास: विवाह और घर से जुड़ी जरूरतों के लिए 5-5 बार तक अग्रिम राशि निकाली जा सकेगी।
- निकासी की सीमा: सभी प्रकार की अग्रिम निकासी के लिए न्यूनतम 12 महीने की सदस्यता अनिवार्य होगी। पात्र सदस्य अपने खाते में जमा (कर्मचारी व नियोक्ता अंशदान + ब्याज) का 75 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे।
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 के तहत ईपीएफओ ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना (EDLI)-2026 को अधिसूचित कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का भविष्य निधि ब्याज भी सभी पात्र सदस्यों के खातों में समय पर जमा किया जा चुका है।
विश्वास और एमनेस्टी योजना से पुराने विवादों का होगा निपटारा
नियोक्ताओं को राहत देने के लिए लागू की गई योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए अजीत कुमार ने कहा:
- विश्वास योजना-2026: विलंबित अंशदान से संबंधित मामलों के त्वरित समाधान के लिए देय क्षति राशि को काफी कम और तर्कसंगत बनाया गया है। यह योजना 14 जून 2024 से पूर्व की अवधि के मामलों पर लागू होगी।
- एमनेस्टी योजना: बिना औपचारिक छूट अधिसूचना के भविष्य निधि ट्रस्ट संचालित कर रहे प्रतिष्ठानों को नियमित करने और अनुपालन राहत देते हुए पुराने विवाद सुलझाने का अवसर दिया गया है।
विशेष कर्मचारी नामांकन अभियान (1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026)
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत पात्र छूट गए कर्मचारियों को ईपीएफओ से जोड़ा जा सकेगा। जिन कर्मचारियों का पूर्व में अंशदान नहीं कटा था, उनका अंशदान माफ कर दिया जाएगा। नियोक्ता केवल निर्धारित अंशदान, ब्याज व प्रशासनिक शुल्क जमा करा सकेंगे, जबकि विलंब क्षति राशि मात्र ₹100 तय की गई है।
रोजगार सृजन और पेंशनभोगियों को सौगात
- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY): ₹1 लाख तक के मासिक वेतन वाले पात्र कर्मचारियों को ध्यान में रखते हुए, पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं और नए अवसर पैदा करने वाले नियोक्ताओं दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
- सुगम भुगतान व्यवस्था: केंद्रीकृत भविष्य निधि एवं पेंशन भुगतान प्रणाली लागू की गई है। इसके अलावा, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के जरिए पेंशनभोगी अब घर बैठे डाक सेवक के माध्यम से निःशुल्क डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करा सकते हैं।
संवाद और जागरुकता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय आयुक्त-द्वितीय सुधीर कुमार बत्रा ने ईपीएफओ के विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी और प्रतिष्ठानों से विश्वास योजना का लाभ उठाने की अपील की।
इससे पहले दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक गोविंद राम मित्तल ने अजीत कुमार का स्वागत किया और विश्वास योजना-2026 को उद्योगों के लिए बेहद उपयोगी बताया। एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक मेहता ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से उद्योग जगत और ईपीएफओ के बीच आपसी संवाद मजबूत होता है। परिचर्चा में कोटा क्षेत्र के कई प्रमुख उद्यमियों और औद्योगिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।