‘आयुर्वेद ही सभी चिकित्सा पद्धतियों की जननी’ — राज्यपाल
नरेश गुनानी
जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि महात्मा गांधी सत्य को ईश्वर का सर्वोच्च रूप मानते थे और सत्याग्रह का उनका दर्शन यह था कि अन्याय के खिलाफ बिना हिंसा के केवल नैतिकता के बल पर प्रतिकार किया जाए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सादगीपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र के लिए समर्पित उनका जीवन उच्च नैतिकता से ओतप्रोत था। राज्यपाल ने देशवासियों से गांधी और शास्त्री जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया तथा उनकी जयंती के अवसर पर शोध-आधारित इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति में डेटा के महत्व से जुड़े आयोजन को अत्यंत प्रासंगिक बताया।
राज्यपाल शुक्रवार को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस में “इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में डेटा का महत्व एवं भूमिका” विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
पेड़-पौधों के अर्क से जुड़ी पैथी और आयुर्वेद का गौरवशाली इतिहास
संबोधन के दौरान राज्यपाल ने इलेक्ट्रोपैथी को पेड़-पौधों के अर्क से तैयार चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा कि वास्तव में आयुर्वेद ही सभी चिकित्सा पद्धतियों की जननी है। उन्होंने बख्तियार खिलजी द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में आग लगाने की ऐतिहासिक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय आयुर्वेद के महान ज्ञान से जिस खिलजी का सफल इलाज किया गया था, उसने उसी ज्ञान संपदा को नष्ट करने का कुत्सित प्रयास किया।
शास्त्री जी के जीवन से सादगी और ईमानदारी की प्रेरणा
राज्यपाल ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन का एक भावुक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि वे घर-खर्च के लिए अपनी पत्नी को पचास रुपये देते थे। एक बार जब किसी ज़रूरतमंद ने उनसे पैसे मांगे, तो उनकी पत्नी ने अपनी बचत में से वह राशि उपलब्ध कराई। जब शास्त्री जी को इस बात का पता चला कि इतने पैसों में भी बचत हो रही है, तो उन्होंने अपनी तनख्वाह से वह बचत राशि लेना ही बंद कर दिया। शास्त्री जी सदैव राष्ट्र के प्रति समर्पित रहे। इसके साथ ही राज्यपाल ने गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा की संस्कृति को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके सिद्धांतों को अपनाने पर बल दिया।
प्रमुख वक्ताओं और अतिथियों के विचार
- मुख्य वक्ता (संजय राय, राष्ट्रीय सचिव – हरिजन सेवक संघ, नई दिल्ली): महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सत्य अंतिम नहीं होता। नवीन संदर्भों और समय के साथ व्यक्ति लगातार निखरता है और उसका कल का सत्य बेहतर बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ता है।
- गोपाल शर्मा (विधायक): उन्होंने गांधी और शास्त्री जी के जीवन को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, ईमानदारी और उच्च नैतिकता का प्रवाह इन महान विभूतियों की ही देन है।
- हेमन्त सेठिया: इलेक्ट्रोपैथी की पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा पद्धति को गांधी और शास्त्री जी के सादगीपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर प्रारंभ किया गया था। वर्ष 2018 में इसे सरकारी मान्यता मिली। यह पूरी तरह से हर्बल पद्धति है और इसके माध्यम से अधिकाधिक लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाने के लिए अनुसंधान में डेटा का महत्व रेखांकित किया जा रहा है।
चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन
संगोष्ठी से पूर्व राज्यपाल ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन के ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का भी गहनता से अवलोकन किया।