​’इमली से खट्टा इश्क-इश्क’ में जीवंत हुईं अधूरे प्रेम, रिश्तों और यादों की कहानियां

जयपुर / योगेश शर्मा/मंगलवार शाम जयपुर के प्रसिद्ध ‘स्पाइस कोर्ट’ में आयोजित सांस्कृतिक मंच ‘इमली से खट्टा इश्क-इश्क’ ने प्रेम, बिछड़न, इंतजार और यादों के अनछुए पहलुओं को गीत, कविता, स्टोरीटेलिंग और बेहतरीन नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘अधूरे प्रेम की पूरी दास्तान’ रही, जिसमें कलाकारों ने मानवीय भावनाओं की उन परतों को मंच पर उतारा, जो अक्सर शब्दों से परे होती हैं।

​साइन लैंग्वेज के जरिए बॉलीवुड के किरदारों को किया साकार

​शाम की सबसे प्रभावशाली और अनूठी प्रस्तुति ‘अर्शदीप संस्थान’ की रही। संस्थान के कलाकारों ने बॉलीवुड के कई लोकप्रिय किरदारों को साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) के माध्यम से मंच पर साकार किया।

बिना बोले जीतीं धड़कनें:

इस प्रस्तुति की विशेष बात यह रही कि मंच पर कलाकार बिना एक भी शब्द बोले, केवल अपने हाव-भाव, चेहरे की भाव-भंगिमाओं और बॉडी लैंग्वेज से पूरी कहानी दर्शकों तक पहुंचाने में सफल रहे। वहीं बैकस्टेज से दर्शकों की सुविधा के लिए संवादों का वॉइस ट्रांसलेशन (ध्वनि अनुवाद) सुनाई दे रहा था।

 

​’30 सेकंड की अफवाह’ का दिया झकझोरने वाला संदेश

​इसी मूक अभिनय (माइम/साइन लैंग्वेज) की प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील सामाजिक संदेश भी दिया। नाटक में दिखाया गया कि “सिर्फ 30 सेकंड की एक अफवाह, किसी भी व्यक्ति के 30 वर्षों के कठिन परिश्रम, प्रतिष्ठा और करियर को गंभीर रूप से तबाह कर सकती है।” इस गहरे संदेश ने वहां मौजूद दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया और खूब तालियां बटोरीं।

​सिनेमा जगत की अधूरी प्रेम कहानियों से सजी शाम

​कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा के इतिहास के कुछ सबसे चर्चित और संवेदनशील प्रेम प्रसंगों को मंच पर बेहद कलात्मकता के साथ प्रस्तुत किया गया:

  • मीना कुमारी और कमाल अमरोही: इन दोनों के रिश्ते की संवेदनशीलता, उतार-चढ़ाव और गहरे प्रेम को चुनिंदा संवादों के माध्यम से उकेरा गया।
  • गुरु दत्त और वहीदा रहमान: सदाबहार गीत “जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला…” के बैकग्राउंड के साथ इन दोनों महान कलाकारों की भावनात्मक और दर्दभरी यात्रा को मंच पर री-क्रिएट किया गया।
  • अमिताभ, जया और रेखा का प्रसंग: इसके अलावा रेखा, जया बच्चन और अमिताभ बच्चन से जुड़े चर्चित प्रसंगों को भी नाट्य रूपांतरण के जरिए प्रस्तुत किया गया। इस दौरान जब रेखा का प्रसिद्ध संवाद—“आप अपने विश्वास के साथ रहिए, मैं अपने प्यार के साथ रहूंगी”—मंच से गूंजा, तो दर्शकों ने इसकी विशेष सराहना की।

​इस साहित्यिक-सांस्कृतिक पहल के पीछे की टीम

​इस खूबसूरत शाम को सजाने और ‘शाम-ए-शब्द’ मंच को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में कई दिग्गजों का योगदान रहा:

पद/भूमिका

नाम

संस्थापक (Founders)

दीपा माथुर, अभिषेक मिश्रा, वरुण भंसाली, निखिल कपूर और विजय गोलेचा

फोरम लीडर्स (Forum Leaders)

रेशमा खान, चेतना शर्मा और पुष्पेंद्र उपाध्याय

मेंटर्स (Mentors)

कमला पोद्दार और विनोद भारद्वाज

ये सभी मेंटर्स और लीडर्स अपने समृद्ध अनुभव और मार्गदर्शन से इस साहित्यिक-सांस्कृतिक पहल को निरंतर नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

​कला की कहानी, कलाकार की जुबानी

​’कला की कहानी, कलाकार की जुबानी’ की अनूठी अवधारणा (Concept) पर आधारित इस आयोजन ने प्रेम की अधूरी कहानियों को पूर्ण संवेदनशीलता और कलात्मकता के साथ पेश किया। गीत, अभिनय, कविता और स्टोरीटेलिंग की विभिन्न विधाओं के माध्यम से सजी यह शाम भावनाओं, स्मृतियों और मानवीय रिश्तों के अनेक रंगों को समर्पित रही, जिसने जयपुर के कलाप्रेमियों के दिल पर एक गहरी और अमिट छाप छोड़ी।

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