‘इण्डिया स्टोनमार्ट 2026’ का समापन: सुरक्षित खनन और पर्यावरण संतुलन पर राज्यपाल का जोर

‘इण्डिया स्टोनमार्ट 2026’ का समापन: सुरक्षित खनन और पर्यावरण संतुलन पर राज्यपाल का जोर

| नरेश गुनानी

जयपुर, 08 फरवरी 2026: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रविवार को ‘इण्डिया स्टोनमार्ट 2026’ के समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने पत्थर उद्योग और प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों से आह्वान किया कि वे सुरक्षित खनन के साथ-साथ पर्यावरण और पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) संतुलन को अपनी प्राथमिकता में रखें। उन्होंने इस आयोजन को पत्थर उद्योग, शिल्प निर्माण और उद्यमिता के भविष्य के द्वार खोलने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बताया।

​राजस्थान का पाषाण वैभव और वैश्विक पहचान

​राज्यपाल ने राजस्थान की खनिज संपदा की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश न केवल पत्थर खनन में, बल्कि उनकी विविधता और निर्यात में भी देश का नेतृत्व कर रहा है। कार्यक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • देश में अग्रणी: भारत के कुल पत्थर खनन और प्रसंस्करण में राजस्थान का 70 प्रतिशत योगदान है।
  • खनिजों की विविधता: प्रदेश में वर्तमान में 81 प्रकार के पत्थरों का खनन हो रहा है, जिनमें से 57 का व्यावसायिक दोहन किया जा रहा है।
  • प्रमुख उत्पादक: राजस्थान संगमरमर (मार्बल), ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन) के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल है।

​सामाजिक सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी

​बागडे ने उद्योग जगत को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा कि खनन क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल सरकारी नीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक परिपक्व उद्योग की नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि इण्डिया स्टोनमार्ट जैसे आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य राजस्थान के पाषाण वैभव से जुड़े विचारों का वैश्विक स्तर पर प्रसार करना है।

​”भारतीय पत्थर-उद्योग ने अपनी विशिष्ट पहचान विश्वभर में स्थापित कर ली है। पाषाण निर्मित दुर्गों, मंदिरों और महलों से लेकर आधुनिक संस्थानों तक, पत्थरों के उपयोग ने हमारे निर्माण को स्थायित्व और दृढ़ता प्रदान की है।”

 

​शिल्प और आधुनिक उपयोग का अवलोकन

​राज्यपाल ने आयोजन स्थल पर विभिन्न स्टॉल्स का दौरा किया। उन्होंने वहां प्रदर्शित पत्थरों के शिल्प-सौंदर्य और आधुनिक निर्माण कार्यों में उनकी उपयोगिता का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने पत्थर खनन से जुड़ी उद्यमिता और औद्योगिक विकास की संभावनाओं को और अधिक तलाशने पर बल दिया।

उपस्थिति: समारोह के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिल्पकार और अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने चार दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के निष्कर्षों पर चर्चा की।

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