इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए बनेगी समेकित कार्ययोजना

जयपुर | 6 अगस्त | नरेश गुनानी |  इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) क्षेत्र में उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार एक एकीकृत मॉडल तैयार करने जा रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) विभाग को इस संबंध में एक समेकित कार्ययोजना (Integrated Action Plan) का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

​इस योजना के तहत प्रेशर इरिगेशन, फार्म डिग्गी, पीएम-कुसुम, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और नहरों के आधुनिकीकरण जैसी योजनाओं को एक साथ जोड़कर प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

​विकसित राजस्थान-2047 के विजन पर जोर

​मुख्य सचिव ने बैठक में आईजीएनपी क्षेत्र के क्रॉपिंग पैटर्न एवं जल उपयोग की गहन समीक्षा की और निम्नलिखित प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किए:

    • व्यापक रिवर बेसिन प्लान: अधिकारियों को आईजीएनपी क्षेत्र के लिए एक व्यापक रिवर बेसिन प्लान तैयार करने और क्षेत्रवार फसल पैटर्न का वैज्ञानिक अध्ययन करने के निर्देश दिए गए।
    • ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ मिशन: कम पानी में अधिक उत्पादन और अधिक आर्थिक लाभ देने वाली खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
    • अंतिम चरण में तकनीक का विस्तार: आईजीएनपी के द्वितीय चरण में प्रेशर इरिगेशन और सोलर सिस्टम आधारित सिंचाई व्यवस्था का तेजी से विस्तार करने तथा किसानों को फार्म डिग्गी एवं सौर पैनल से जोड़ने के लिए अभियान चलाने को कहा गया।

“परियोजना का उद्देश्य केवल सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाते हुए उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। विकसित राजस्थान-2047 के विजन के अनुरूप कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु-अनुकूल बनाना हमारी प्राथमिकता है।”

वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव

 

​अनुसंधान, उन्नत फसलें और विभागीय समन्वय

​कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों की भूमिका पर भी चर्चा की गई:

      1. कम पानी वाली फसलों का विकास: कृषि विश्वविद्यालयों को इसबगोल, क्लस्टर बीन (ग्वार) तथा कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की उन्नत किस्मों के विकास और प्रसार पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए।
      2. किसानों के लिए जागरूकता अभियान: कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), एटीसी और अनुसंधान संस्थानों को इस अभियान से जोड़कर किसानों के लिए एक्सपोजर विजिट, फील्ड ट्रायल और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
      3. अंतर-विभागीय समन्वय: सीएडी विभाग को कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

​बैठक में उपस्थिति

​समीक्षा बैठक में प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल, आयुक्त (उद्यानिकी) श्वेता चौहान, कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल सहित सीएडी, जल संसाधन विभाग, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर-काजरी (ICAR-CAZRI) तथा संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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