इंडिया स्टोनमार्ट 2028: राजस्थान को औद्योगिक हब बनाने के लिए रीको, सिडोस और लघु उद्योग भारती के बीच त्रिपक्षीय एमओयू

सुनील शर्मा 

जयपुर। राजस्थान को एक बड़ा औद्योगिक हब बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के संकल्प के साथ इंडिया स्टोनमार्ट 2028 के आयोजन की नींव रख दी गई है। जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सिडोस) और लघु उद्योग भारती के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

​एमओयू: तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और विश्वास का त्रिवेणी संगम

​उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह एमओयू तीन बड़ी ताकतों को एक साथ लाता है:

  • सिडोस: पत्थर उद्योग से जुड़ी आधुनिक तकनीक, बेहतरीन डिजाइन और टेस्टिंग की विशेषज्ञता।
  • रीको: मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) और आर्थिक सामर्थ्य।
  • लघु उद्योग भारती: एमएसएमई (MSME) सेक्टर का जमीनी नेटवर्क और अटूट विश्वास।

​मंत्री ने कहा कि इन तीनों संस्थाओं के साथ आने से इंडिया स्टोनमार्ट 2028 का आयोजन न केवल ऐतिहासिक होगा, बल्कि राजस्थान का पत्थर पूरी दुनिया के बाजारों में अपनी धाक जमाएगा।

​स्टोनमार्ट 2028 को भव्य और वैश्विक बनाने की तैयारी

​कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार राजस्थान के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 में हुआ स्टोनमार्ट अब तक के सर्वश्रेष्ठ आयोजनों में से एक था, लेकिन 2028 के संस्करण को इससे भी ज्यादा भव्य और वैश्विक बनाना है, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी जानी चाहिए।

​अगले संस्करण के मुख्य लक्ष्य:

  • वैश्विक प्रदर्शनियों का अध्ययन: चीन, लंदन और इटली जैसे देशों में होने वाली बड़ी स्टोन प्रदर्शनियों की खूबियों का अध्ययन कर उन्हें यहाँ लागू किया जाएगा।
  • रिकॉर्ड विदेशी खरीददारी: इस बार विदेशी खरीदारों और वैश्विक निवेशकों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने पर जोर रहेगा।
  • अंतरराष्ट्रीय आर्किटेक्ट्स का जुड़ाव: पिछले आयोजन में देश के आर्किटेक्ट्स को जोड़ा गया था, लेकिन इस बार विदेशी आर्किटेक्ट्स को भी राजस्थान के पत्थरों की खूबियों और उपयोगिताओं से रूबरू कराया जाएगा।
  • स्टार्टअप्स और युवाओं को मौका: पत्थर उद्योग से जुड़ी नई मशीनों, आधुनिक डिजाइन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में युवाओं को आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

​राजस्थान में जल्द शुरू होगा सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन

​कार्यक्रम के दौरान एक और बड़ी घोषणा करते हुए उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के.के. विश्नोई ने बताया कि राजस्थान में निवेश की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के लिए सरकार ने करीब 34 नई नीतियां लागू की हैं।

​इसी कड़ी में राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति लाई गई है, जिसके तहत बहुत जल्द राजस्थान में भी सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन शुरू होने जा रहा है। उन्होंने देशहित और उद्योग हित में नीति-निर्माण के लिए लघु उद्योग भारती के प्रयासों की भी सराहना की।

 

​17-20 फरवरी 2028 को होगा 14वां इंडिया स्टोनमार्ट, 11 देशों में होंगे रोड शो

​इंडिया स्टोनमार्ट के अगले (14वें) संस्करण का आयोजन 17 से 20 फरवरी, 2028 को किया जाएगा। इस बार वैश्विक स्तर पर भागीदारी बढ़ाने के लिए दुनिया के 11 देशों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे।

​एमओयू कार्यक्रम के अवसर पर एक विशेष सत्र भी रखा गया। इसमें सरकार के प्रतिनिधियों और स्टोन इंडस्ट्री के दिग्गजों के बीच नई तकनीक, नवाचार (इन्नोवेशन), वैश्विक बाजार की संभावनाओं, एक्सपोर्ट प्रमोशन और उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

​एक नजर में: इंडिया स्टोनमार्ट 2026 के रिकॉर्ड आंकड़े

​पिछले संस्करण (2026) की सफलता यह साबित करती है कि इंडिया स्टोनमार्ट अब सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि एक वैश्विक व्यापारिक मंच बन चुका है। इसके मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

मुख्य बिंदु

आंकड़े

कुल प्रदर्शनी क्षेत्र

लगभग 45,000 वर्गमीटर

कुल प्रदर्शक (Exhibitors)

450

विदेशी प्रदर्शक / कंपनियां

59

अंतरराष्ट्रीय कंट्री पवेलियन

3 (तुर्किये, चीन और ईरान)

सहभागी देश और भारतीय राज्य

8 देश और 15 भारतीय राज्य

कुल आगंतुक (Visitors)

27,256 से अधिक

व्यापारिक आगंतुक (Business Visitors)

21,431 से अधिक

विदेशी प्रतिनिधि (International Delegates)

58 देशों से

आर्किटेक्ट एवं डिजाइन विशेषज्ञ

429

पिछले आयोजन में गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों ने पहली बार संगठित राज्य पवेलियन के रूप में हिस्सा लिया था। इतनी बड़ी संख्या में आर्किटेक्ट्स और डिजाइनरों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में नेचुरल स्टोन्स (प्राकृतिक पत्थरों) की मांग और उपयोग की संभावनाएं तेजी से बढ़ने वाली हैं।

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