इंटक की धमाकेदार वापसी: रायगढ़ क्षेत्र में मजदूरों का भरोसा जीत कर बनी नंबर दो यूनियन, बीएमएस के करीब पहुंची
संवाददाता – छाल , रायगढ़ | Telegraph Times By : गणपत चौहान ,छत्तीसगढ़ | जुलाई 19,2025
रायगढ़, एसईसीएल – रायगढ़ क्षेत्र में श्रमिक राजनीति ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां इंटक (INTUC) ने एचएमएस (HMS) और एटक (AITUC) जैसी प्रमुख यूनियनों को पछाड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल कर लिया है और अब वह बीएमएस (BMS) के बिल्कुल करीब पहुंच गई है। यह उपलब्धि खास तौर पर केंद्रीय अध्यक्ष माननीय श्री गोपाल नारायण सिंह जी के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय सचिव श्री डी.एल. ग्वालवंशी एवं क्षेत्रीय महासचिव श्री मुकेश कुमार मंडल के मजबूत नेतृत्व का नतीजा है।

वर्ष भर में चौथे से दूसरे स्थान तक का सफर
पिछले वर्ष तक इंटक चौथे स्थान पर थी, लेकिन इस बार की मतदान संख्या और श्रमिक समर्थन ने सबको चौंका दिया है। चौथे से सीधे दूसरे स्थान पर आना, रायगढ़ क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।
शाखा स्तर पर इंटक की मजबूती
- जामपाली क्षेत्र, जहां इंटक पिछले 11 वर्षों से नंबर वन बनी हुई है, इस बार और भी अधिक संख्या बल के साथ शीर्ष पर रही।
- रायगढ़ शाखा ने इस बार ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सीधे नंबर वन का स्थान हासिल कर लिया है।
- छाल उपक्षेत्र में भी इंटक ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है और भविष्य में नंबर वन बनने की संभावनाएं प्रबल हैं।
- बरौद-बेजारी क्षेत्र में भी इंटक ने पिछले साल की तुलना में अपनी स्थिति मजबूत की है, जो इसके लगातार विस्तार का संकेत है।
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मजदूरों के साथ आत्मीय जुड़ाव बना विश्वास की वजह
इंटक की इस सफलता के पीछे संगठन के पदाधिकारियों का निस्वार्थ भाव से श्रमिकों के लिए काम करना, उनके सुख-दुख में साथ खड़ा रहना, और हर समस्या का प्रबंधन के साथ सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना मुख्य कारण रहा है। यही वजह है कि मजदूरों ने इंटक पर अपना विश्वास दोहराया है।
इतिहास और भविष्य
गौरतलब है कि इंटक रायगढ़ क्षेत्र की फाउंडर यूनियन रही है और पहले लंबे समय तक नंबर वन की कुर्सी पर काबिज रही है। केंद्रीय स्तर की आपसी राजनीति के चलते एक समय यह पीछे जरूर हुई, लेकिन अब नए नेतृत्व और ईमानदार मेहनत से पुनः अपनी जगह बना रही है।
इस पूरे अभियान में केंद्रीय अध्यक्ष श्री गोपाल नारायण सिंह जी की भूमिका निर्णायक रही है। उनके नेतृत्व में इंटक ने पूरे एसईसीएल में अपना खोया हुआ विश्वास वापस पाया है और अब संगठन लगातार मजबूत स्थिति की ओर अग्रसर है।