इंजीनियरिंग छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष सत्र आयोजित: तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संबल और एआई के दौर में मानवीय जुड़ाव पर हुआ मंथन

जयपुर/ योगेश शर्मा/इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान बनने वाले शैक्षणिक और करियर के दबाव को संतुलित करने तथा विद्यार्थियों में मानसिक सेहत के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस ने ‘माई सेफ स्पेस’ के सहयोग से एक विशेष व विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व से परिचित कराना, इस विषय पर खुलकर संवाद स्थापित करना और दैनिक जीवन में तनाव से निपटने के व्यावहारिक उपाय सुझाना रहा।

​मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही आवश्यक: ह्यूबर्ट जेरोम

​सत्र के मुख्य वक्ता ‘माई सेफ स्पेस’ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ह्यूबर्ट जेरोम रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक तंदुरुस्ती के समान ही नियमित देखभाल और प्राथमिक ध्यान की आवश्यकता होती है।

​उन्होंने इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के समक्ष आने वाली अनूठी चुनौतियों, प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा, प्लेसमेंट के दबाव और भविष्य की चिंताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मन की उलझनों को साझा करना या पेशेवर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता, शक्ति और आत्मनिर्भरता का परिचायक है। उन्होंने एक ऐसा संबलकारी परिवेश तैयार करने पर बल दिया जहाँ कोई भी छात्र बिना किसी झिझक या संकोच के अपनी भावनात्मक स्थिति व्यक्त कर सके।

​एआई के युग में मानवीय संवेदना और सहानुभूति की भूमिका

​कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के वर्तमान युग में मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित विमर्श रहा। ह्यूबर्ट जेरोम ने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक और एआई ने सीखने, कार्य करने और संवाद के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे अलगाव की भावना भी बढ़ सकती है। ऐसे तकनीकी युग में मानवीय संपर्क, सहानुभूति (एम्पैथी) और आपसी आत्मीयता को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

​व्यावहारिक समझ और परस्पर सहयोग का संदेश

​सत्र के दौरान छात्रों को आत्म-जागरूकता (सेल्फ-अवेयरनेस) विकसित करने के कई व्यावहारिक सूत्र दिए गए:

  • ​अपनी मनःस्थिति और भावनाओं में आने वाले नकारात्मक बदलावों को समय रहते पहचानना।
  • ​दोस्तों या सहपाठियों में अवसाद, अत्यधिक तनाव अथवा अकेलेपन के संकेतों को भांपना।
  • ​किसी जरूरतमंद साथी की बात को बिना किसी पूर्वाग्रह के ध्यानपूर्वक सुनना और उन्हें उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना।

​जीवंत सवाल-जवाब और संवाद

​पारस्परिक संवाद (इंटरैक्टिव फॉर्मेट) पर आधारित इस सत्र में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिचर्चा के उपरांत आयोजित प्रश्नोत्तरी खंड में विद्यार्थियों ने करियर की चिंता, स्क्रीन टाइम के प्रभाव और भावनात्मक संतुलन से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका वक्ता ने तार्किक और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया।

​कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य और वरिष्ठ पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

​सत्र के समापन पर स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस की प्रमुख डॉ. नेहा पुरोहित ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने ज्ञानवर्धक सत्र के लिए मुख्य वक्ता, संस्थान प्रबंधन, प्राध्यापकों तथा सभी प्रतिभागी छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह सत्र युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाने और परिसर में सकारात्मक माहौल विकसित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

Block title
Related

अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र: सड़कों के विकास के लिए 4.24 करोड़ रुपये की सौगात, विधानसभा अध्यक्ष के प्रयासों को मिली गति

अजमेर/ नरेश गुनानी/राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के निरंतर...