आस्था के केंद्र पुष्कर सरोवर पर संकट, बरसाती फीडर बने गंदे पानी के नाले

आस्था के केंद्र पुष्कर सरोवर पर संकट, बरसाती फीडर बने गंदे पानी के नाले

पुष्कर (अजमेर) | हरिप्रसाद शर्मा

​धार्मिक नगरी पुष्कर, जिसे तीर्थराज कहा जाता है, आज प्रशासनिक अनदेखी और रसूखदारों की मनमानी के कारण अपनी पवित्रता खोने की कगार पर है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र पुष्कर सरोवर में पहाड़ों का शुद्ध जल पहुँचाने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर ‘बरसाती फीडर’ बनवाए थे। लेकिन आज ये फीडर बरसाती पानी के बजाय होटलों और रिजॉर्ट्स की गंदगी ढो रहे हैं।

करोड़ों की लागत, पर नतीजों में केवल गंदगी

​सरकार का मुख्य उद्देश्य पहाड़ों से आने वाले वर्षाजल को बिना किसी बाधा के सरोवर तक पहुँचाना था। इसके लिए व्यापक स्तर पर ड्रेनेज सिस्टम और फीडर लाइनें बिछाई गईं। लेकिन हकीकत यह है कि इन फीडरों का इस्तेमाल अब रसूखदार होटल और रिजॉर्ट मालिकों द्वारा ‘सीवरेज डंप’ के रूप में किया जा रहा है।

लीलासेवड़ी फीडर: काले पानी का सैलाब

​क्षेत्र के लीलासेवड़ी फीडर की स्थिति सबसे अधिक भयावह है। जहाँ कभी कल-कल करता साफ पानी बहना चाहिए था, वहाँ आज बदबूदार काला पानी बह रहा है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि:

  • ​बड़े होटलों और रिजॉर्ट्स का गंदा पानी सीधे इन फीडरों में छोड़ा जा रहा है।
  • ​नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
  • ​फीडर के आसपास असहनीय बदबू के कारण लोगों का निकलना दूभर हो गया है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल

​इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की चुप्पी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदारों ने अपनी आँखों पर ‘काला चश्मा’ चढ़ा रखा है।

​”क्या प्रशासन को यह काला और बदबूदार पानी दिखाई नहीं देता? क्या रसूखदारों के दबाव में सरकार के करोड़ों के प्रोजेक्ट को बर्बाद होने दिया जाएगा?” — स्थानीय नागरिक

 

आस्था के साथ खिलवाड़

​पुष्कर सरोवर में देश-दुनिया से श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए आते हैं। यदि इन फीडरों के माध्यम से होटलों की गंदगी सरोवर तक पहुँचती है, तो यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है।

​सरकारी मंसूबों पर पानी फेरने वाले इन रसूखदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की दरकार है। जब तक अवैध कनेक्शनों को काटकर भारी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, तब तक ‘तीर्थराज’ की पवित्रता को बचाना मुश्किल होगा। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या पुष्कर की यह धरोहर ऐसे ही गंदे नालों में तब्दील होती रहेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

Block title
Related

महिला आईटीआई जोधपुर में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ और ‘हर घर तिरंगा’ पर संगोष्ठी आयोजित

जोधपुर / प्रीति बालानी/ केंद्रीय संचार ब्यूरो, जोधपुर द्वारा...

अचल संपत्ति लेन-देन में SFT अनुपालन को सुदृढ़ करने के लिए आयकर निदेशालय का आउटरीच कार्यक्रम आयोजित

जयपुर/ नरेश गुनानी/ आयकर निदेशालय (खुफिया एवं आपराधिक अन्वेषण...