आरबीआई की बड़ी पहल: 15 साल बाद फिर शुरू होगा प्लास्टिक नोट्स का ट्रायल, जानिए क्या होंगे फायदे

नई दिल्ली/ गौरव कोचर/ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर देश में कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक (पॉलीमर) बैंकनोट्स की उपयोगिता जांचने के लिए तैयार है। लगभग 15 साल बाद RBI ने प्लास्टिक नोट्स का ट्रायल फिर से शुरू करने की योजना बनाई है। दुनिया भर के 50 से अधिक देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स का सफल संचालन हो रहा है, और भारत में भी अब इसकी संभावनाओं को नए सिरे से टटोला जा रहा है।

​प्लास्टिक नोट्स की तकनीक, इसके फायदे, सुरक्षा मानकों और पर्यावरण पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण यहाँ प्रस्तुत है:

1. 2012 का पिछला ट्रायल क्यों रुक गया था?

​साल 2009-2012 के दौरान आरबीआई ने भारत के विभिन्न जलवायवीय क्षेत्रों (Climate Zones) वाले 5 शहरों—कोच्चि, मैसूर, शिमला, जयपुर और भुवनेश्वर—में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों के फील्ड ट्रायल की घोषणा की थी।

  • जलवायु चुनौतियाँ: अत्यधिक गर्मी, नमी और विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में प्लास्टिक नोटों की टिकाऊपन की जांच की जानी थी।
  • तकनीकी व आपूर्ति बाधाएं: उस समय बुनियादी ढांचे (ATM और नोट सॉर्टिंग मशीन) में बदलाव की लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के कारण यह प्रक्रिया लंबी खिंच गई और ट्रायल व्यापक रूप से आगे नहीं बढ़ सका।
2. प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट्स के प्रमुख फायदे

​कागजी (कॉटन आधारित) नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट्स कई मायनों में बेहतर माने जाते हैं:

  • लंबी उम्र (High Durability): कागजी नोट औसतन 1 से 2 साल में खराब या फटने लगते हैं, जबकि प्लास्टिक नोट्स की शेल्फ लाइफ साधारण नोटों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक होती है।
  • पानी और गंदगी से बचाव: ये नोट वाटरप्रूफ होते हैं। पसीने, पानी, तेल या गंदगी का इन पर कोई असर नहीं पड़ता, जिससे ये साफ बने रहते हैं।
  • मशीनों में आसान संचालन: प्लास्टिक नोटों के कारण ATM और नोट काउंटिंग मशीनों में जाम (Jamming) की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।
3. सुरक्षा और नकली नोटों (FICN) पर लगाम

​पॉलीमर बैंकनोट्स सुरक्षा के लिहाज से बेहद मजबूत होते हैं। इन्हें कॉपी करना कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक कठिन है:

  • पारदर्शी खिड़की (Transparent Window): पॉलीमर नोट्स में एक पारदर्शी हिस्सा होता है, जिसे साधारण प्रिंटर या कागजी तकनीकों से बनाना नामुमकिन है।
  • उन्नत होलोग्राम और सूक्ष्म प्रिंटिंग: प्लास्टिक सतह पर उन्नत सुरक्षा फीचर्स, जैसे कि बदलते रंगों वाली स्याही और जटिल होलोग्राम, बहुत बारीकी से अंकित किए जाते हैं।
  • जालसाजी में कमी: जटिल निर्माण प्रक्रिया के कारण जाली नोट छापने वाले गिरोहों के लिए इसकी नकल करना आर्थिक और तकनीकी रूप से बहुत कठिन हो जाता है।
​4. पर्यावरण बचत और रीसाइक्लिंग

​हालाँकि पहली नज़र में ‘प्लास्टिक’ शब्द पर्यावरण के अनुकूल नहीं लगता, लेकिन पॉलीमर नोट्स का समग्र कार्बन फुटप्रिंट कागजी नोटों से कम होता है:

पहलू

कागजी (कॉटन) नोट

प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट

रीसाइक्लिंग

खराब होने पर जलाना या नष्ट करना पड़ता है

गंदे/पुराने होने पर पिघलाकर नए उत्पाद बनाए जा सकते हैं

पेड़ों व पानी की बचत

कॉटन और लकड़ी के पल्प का अत्यधिक उपयोग

पेड़ों और प्राकृतिक संसाधनों की कम खपत

कार्बन उत्सर्जन

बार-बार छापने और बदलने से अधिक ट्रांसपोर्टेशन लागत

लंबी उम्र के कारण कम प्रिंटिंग और कम परिवहन उत्सर्जन

आगे की राह

​दुनिया भर में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और वियतनाम जैसे कई देशों ने पूरी तरह या आंशिक रूप से पॉलीमर बैंकनोट्स को अपनाया है। भारत जैसे विशाल और विविध जलवायु वाले देश में प्लास्टिक नोट्स का व्यापक उपयोग शुरू करने से पहले आरबीआई ट्रायल के नतीजों, लागत-प्रभावशीलता और बुनियादी ढांचे की तैयारी का बारीकी से मूल्यांकन करेगा।

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