आरतिया ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए अग्निशमन, पर्यावरणीय और नियामकीय सुधारों पर दिए व्यावहारिक सुझाव
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 21,2025
जयपुर। भारत सरकार की “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की दिशा में नियामकीय ढांचे को सुगम बनाने हेतु कैबिनेट सचिवालय, भारत सरकार के तत्वावधान में शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मनोज गोविल, आईएएस ने की। राजस्थान सरकार की ओर से प्रमुख सचिव, उद्योग विभाग अजीताभ शर्मा, आईएएस और आयुक्त उद्योग रोहित गुप्ता, आईएएस उपस्थित रहे। इस मौके पर राज्य के प्रमुख उद्योग और व्यापार संगठनों ने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।
आरतिया की ओर से महत्वपूर्ण प्रस्तुति
इस बैठक में अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशंस (आरतिया) की ओर से संगठन के रणनीतिक सलाहकार अजय कुमार गुप्ता ने उद्योग जगत से जुड़े जमीनी मुद्दों और उनके समाधान पर आधारित सुझावों को विस्तार से प्रस्तुत किया। उनका फोकस विशेष रूप से अग्निशमन एनओसी, पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि उपयोग, भवन स्वीकृति, श्रम सुधार, और एकीकृत अनुमति पोर्टलों पर रहा।
अग्निशमन (Fire NOC) सुधार के सुझाव:
गुप्ता ने बताया कि अग्निशमन एनओसी की प्रक्रिया को उद्योगों की जोखिम की प्रकृति के अनुसार श्रेणियों में विभाजित किया जाना चाहिए:
- कम व उच्च जोखिम वाले उद्योगों के लिए अलग-अलग मानक तय किए जाएं।
- थर्ड पार्टी अग्नि जोखिम मूल्यांकन को अनिवार्य बनाया जाए।
- रिसर्च लैब्स, केमिकल इंडस्ट्रीज़ जैसे हाई रिस्क उद्योगों में OISD जैसे तकनीकी मानकों को अपनाया जाए।
- फायर एनओसी प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध किया जाए।
- एनओसी की वैधता अवधि बढ़ाई जाए जिससे उद्यमियों को बार-बार अनुमति लेने की आवश्यकता न पड़े।
पर्यावरणीय मंजूरी सुधार:
आरतिया ने पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए व्यावहारिक और तकनीकी सुझाव दिए:
- उद्योगों का वर्गीकरण कच्चे माल, प्रक्रिया व अपशिष्ट उत्पादन के आधार पर किया जाए।
- एक डिजिटल तकनीकी सूची बनाई जाए जिसमें प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की लागत और प्रभावशीलता दोनों का उल्लेख हो।
- थर्ड पार्टी तकनीकी मूल्यांकन को लागू किया जाए ताकि निष्पक्ष और विशेषज्ञता-आधारित निर्णय लिए जा सकें।
- अनुमतियों की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए और ट्रैकिंग सिस्टम उपलब्ध कराया जाए।
भवन एवं भूमि उपयोग सुधार:
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मिश्रित भूमि उपयोग की अनुमति दी जाए।
- भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया GIS आधारित डाटाबेस से जुड़ी हो और समयबद्ध हो।
- भवन स्वीकृति के नियमों में FAR, सेटबैक और पार्किंग के मानकों में लचीलापन लाया जाए।
- थर्ड पार्टी निरीक्षकों को अधिकृत कर स्वीकृति और कंप्लीशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी की जाए।
श्रम कानूनों में लचीलापन:
- महिलाओं को रात्रिकालीन कार्य की अनुमति दी जाए, उचित सुरक्षा प्रबंधों के साथ।
- श्रम नियमों को उद्योगों की वास्तविकता के अनुरूप उपयुक्त संशोधन किया जाए।
- एकीकृत पोर्टल के माध्यम से बिजली, जल और भूजल कनेक्शन की सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- थर्ड पार्टी प्रमाणन को मान्यता मिले ताकि अनुपालन में गति और पारदर्शिता आ सके।
अन्य महत्वपूर्ण सुझाव:
- छोटे और मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण अनिवार्य किया जाए।
- अपराधमुक्तिकरण के तहत कई दंडात्मक प्रावधानों को तार्किक और अनुकूल बनाया जाए।
- राज्य सिंगल विंडो सिस्टम को पूरी तरह सभी विभागों से जोड़ा जाए ताकि उद्यमियों को एक ही मंच पर सभी सेवाएं मिल सकें।
नीति निर्माण के लिए समन्वय समिति का सुझाव
अंत में आरतिया ने केंद्र व राज्य सरकारों से आग्रह किया कि:
- उद्योग मैत्री राज्य नीति बनाई जाए।
- एक उच्च स्तरीय सुधार कार्यबल या समिति का गठन किया जाए जिसमें उद्योग प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हों।
यह समिति राज्य के उद्योग वातावरण को अधिक सक्षम, पारदर्शी और निवेश के लिए आकर्षक बना सकेगी।